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“ पूर्वांचल का सामाजिक-आर्थिक ढांचा और स्त्री की बदलती भूमिका ” विषय पर विमर्श 16 को

गोरखपुर। मेरा रंग फाउंडेशन की ओर  “ पूर्वांचल का सामाजिक-आर्थिक ढांचा और स्त्री की बदलती भूमिका ” विषय पर विमर्श का आयोजन 16 नवम्बर को दोपहर दो बजे से गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में शिक्षा, तकनीक, रोजगार और स्वतंत्रता के नए अवसरों के बीच पूर्वांचल में स्त्री की बदलती भूमिका पर चर्चा की जाएगी।

मेरा रंग फाउंडेशन की संस्थापक ने शालिनी श्रीनेत ने बताया कि  पूर्वांचल सदैव परंपरा और परिवर्तन के बीच जीता रहा है। यहाँ की स्त्रियाँ अब केवल घर और परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन, मीडिया और उद्यमिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी जगह बना रही हैं। यह आयोजन इसी बदलते सामाजिक परिदृश्य को समझने और इस प्रश्न पर विचार करने का प्रयास है कि क्या पूर्वांचल की महिलाओं को समान अवसर, शिक्षा में बराबरी और निजी स्वतंत्रता वास्तव में मिल पा रही है ? संवाद में यह भी चर्चा होगी कि बदलते समाज में स्त्रियों के बदलते रहन-सहन, विचार और निर्णयों को किस हद तक सामाजिक स्वीकृति प्राप्त हो रही है।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे वक्ता शामिल होंगे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में स्त्री और समाज के बदलते संबंधों को गहराई से समझा और जिया है। कार्यक्रम में शामिल हो रहीं प्रियंका सोनकर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में सहायक प्रोफेसर हैं और स्त्री तथा दलित अध्ययन पर अपने संवेदनशील लेखन और शोध के लिए जानी जाती हैं। प्रो. सुभी धूसिया, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर हैं और जेंडर सेंसिटाइजेशन व सामाजिक स्तरीकरण पर उनके शोध राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हैं। डॉ. राम नरेश, गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं, जो दलित और स्त्री विमर्श के सशक्त आलोचक और लेखक के रूप में पहचाने जाते हैं। रीता कौशिक, सामुदायिक कल्याण एवं विकास संस्थान (SKVS) की संस्थापक हैं और हाशिए पर पड़ी लड़कियों की शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। वहीं निहारिका शर्मा, भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी एवं 26वीं बटालियन पीएसी, गोरखपुर की कमांडेंट हैं, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा में महिला सुरक्षा और सामुदायिक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

फाउंडेशन की संस्थापक ने शालिनी श्रीनेत कहा कि यह आयोजन केवल एक विमर्श नहीं, बल्कि पूर्वांचल की स्त्रियों की आवाज़ को सुनने और समझने का साझा प्रयास है। जब स्त्री बदलती है, तो समाज की दिशा भी बदलती है। मेरा रंग फाउंडेशन इस पहल के माध्यम से पूर्वांचल में स्त्रियों के अनुभव, संघर्ष और संभावनाओं को संवाद के माध्यम से मुख्यधारा के विमर्श में लाना चाहता है।

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