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‘ शिक्षा और अधिकार की चेतना से महिलाओं की सामाजिक–आर्थिक ढांचे में भागीदारी बढ़ेगी ’

गोरखपुर। लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध और स्त्री उत्थान के लिए कार्य करने वाली संस्था मेरा रंग फाउंडेशन द्वारा ” पूर्वांचल का सामाजिक–आर्थिक ढांचा और स्त्री की बदलती भूमिका ” विषय पर चर्चा का आयोजन गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के सभागार किया गया ।

चर्चा में बतौर मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर सुभी धूसिया, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ राम नरेश, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रियंका सोनकर, पीएसी 26 वी वाहिनी गोरखपुर की कमांडेंट आईपीएस निहारिका शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता रीता कौशिक ने भाग लिया।

कार्यक्रम के आरंभ में कवयित्री-इतिहासकार सुनीता अबाबील ने अतिथियों का परिचय कराया। मेरा रंग के कार्यकर्ताओं द्वारा पौधे देकर अतिथियों का स्वागत किया गया ।

मेरा रंग फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष शालिनी सिंह श्रीनेत ने संस्था द्वारा महिला अधिकार और लैंगिक समानता के लिए जा रहे विविध कार्यों और उपलब्धियां के बारे में बताया।

चर्चा शुरू करते हुए आईपीएस निहारिका शर्मा ने कहा कि बदलती आर्थिक परिवेश में में अपनी भागीदारी करने के लिए हर उस मानसिकता का विरोध करना होगा जो उन्हें आगे बढ़ने रोकते हैं ।

उन्होंने कहा कि जनता और स्टेट दोनों को महिला उत्थान के खोखले नारे से निकलकर जमीन पर कार्य करना पड़ेगा । महिलाओं की आर्थिक सामाजिक भागीदारी में आड़े आ रहे साइबर क्राइम के मामलों पर बात करते हुए कहा कि कहा कि कंटेंट में क्या छुपाना है और क्या दिखाना है, इस पर गंभीरता से सोचना होगा ।

इसी दौरान श्रोताओं के बीच से लड़कियों के छोटे कपड़े पहनने पर आए सवाल पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को पश्चिमी पहनावे के साथ पश्चिमी महिलाओं के तकनीकी योग्यताओं का भी अध्ययन करना चाहिए ।

प्रोफेसर सुभी धुसिया ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का सबसे मजबूत माध्यम है और महिला शिक्षा की ओर आगे बढ़ रही हैं लेकिन महिलाओं को डिग्री लेने और स्किल डेवलप करने के अंतर को समझना होगा। उन्होंने कहा कि क्वांटिटी में शिक्षित होने से बेहतर क्वालिटी में शिक्षित होना है, तभी उनकी सामाज में आर्थिक भागीदारी हो संभव हो पाएगी ।

अपनी बात रखते हुए डॉ० राम नरेश ने कहा कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है उनका एडमिशन और पुरुषों के मुकाबले ज्यादा हो रहा है, उनकी लंबे समय तक चलने वाली डिग्री की पढ़ाईयों में निरंतरता पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है, लेकिन इसे बहुत ज्यादा महिलाओं के पक्ष में नहीं समझा जा सकता है , महिलाओं की यह पढ़ाई उनके परिवार द्वारा केवल समाज में दिखाने के लिए भी किया जा रहा है जैसे की ‘शादी के प्रोफाइल में वह यह बता सके कि हमारी लड़की ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट है ’
जबकि पुरुष कम समय वाले लेकिन तत्काल आर्थिक रूप से लाभकारी विषयों में पढ़ाई कर रहा है, इसलिए उनकी आर्थिक भागीदारी समाज में महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा है ।

उन्होंने बदलते सामाजिक आर्थिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी के लिए सामाजिक व्यवस्था पर डॉक्टर अंबेडकर के विचार दोहराते हुए कहा कि जातिवाद की मानसिकता से जकड़ा समाज में महिलाओं का कभी भला नहीं हो सकता और स्टेट इसके लिए कोई कारगर उपाय नहीं कर रहा है।

डॉ प्रियंका सोनकर ने कहा की सामाजिक आर्थिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी का रास्ता आसान नहीं है। महिलाओं को जो भी अधिकार मिले हैं वह उन्होंने लड़ कर लिए है। उन्होंने देश में तात्कालिक ’ पीरियड्स के दौरान अवकाश ’ को लेकर चल रहे संघर्षों का हवाला दिया। उन्होंने कहा किया यह सामान्य अधिकार है लेकिन इसके लिए भी बड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर का हिंदू कोड बिल आज तक पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाया। इसे लागू करने की प्रयास में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया, लेकिन वह आज तक लागू नहीं किया गया।आज भी महिलाओं को हिंदू कोड बिल में मिलने वाले अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इनमें सब बातों के बावजूद हमें सकारात्मक तथ्य को खोजना होगा, उन्हें पहचान देना होगा चाहे वो एक प्रतिशत हो तब भी उसे प्रचारित करना होगा ताकि निराश के बजाय आशा दिखाई दे। इसी तरह भले ही आपकी नजर में कम हो लेकिन महिलाओं के सामाजिक– आर्थिक उत्थान के लिए काम कर रहे पुरुषों को भी खुलकर क्रेडिट देना होगा ।

कार्यक्रम का संचालन वैभव श्रीवास्तव ने किया, इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में हो रही चर्चाओं को विषय जोड़े रखा और पूरे कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं से एक सार्थक समाधान की व्याख्या करने की अपील बनाए रखी ।

अंत में पूर्वांचल सेना अध्यक्ष और मेरा रंग फाउंडेशन में बतौर वॉलिंटियर कार्यरत धीरेंद्र प्रताप ने सभी अतिथियों और श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने सरकार द्वारा महिलाओं के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की क्रियान्वयन पर नजर बनाए रखने, परिणामों पर जवाबदेही तय करने और सरकार का सहयोग करने के लिए लोगों से अपील करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

कार्यक्रम में श्रीमती रंजिता, रेनू सिंह, शिवांगी गोयल, दिनेश सिंह श्रीनेत, आसमीन निशा, पवन कुमार, आशीष नंदन, सुजीत मंडल, सविता वर्मा, संगीता मॉल, विकास दुबे, मनोज यादव, अर्चना पांडे, तनु आबादीन, धीरज कुमार, भारती कुमारी, नेहा, शिवानी, राशि, मीरा, रश्मि त्रिपाठी, अनुराग पांडे, पिंकी, निते, हाशमी निशा, शिखा सिंह, अनूप गौतम, अंकित सिंह, सोनी, सरिता शर्मा, पारस नाथ पांडे, कनक सिंह, स्वीटी गोयल, संतोष , हेमंत त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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