गोरखपुर एन्वायरन्मेंटल एक्शन ग्रुप (जीईएजी)ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरा होने पर 15-16 नवंबर को सिविल लाइन्स स्थित लाॅज निपाल परिसर में स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया है।
दो दिवसीय समारोह में देश के ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद् भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर प्रमुख उद्बोधन सेंटर फार साइंस एण्ड एनवायरन्मेन्ट की महानिदेशक पद्मश्री डा0 सुनीता नरायन का होगा। समापन उद्बोधन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित ‘जल पुरुष’ श्री राजेन्द्र सिंह करेंगे। समारोह में डा0 सैम जोसेफ, बीज बचाओ अभियान के सह-संस्थापक श्री बीजू नेगी, धान विशेषज्ञ पद्मश्री डा0 आर.सी. चौधरी, आई.आई.टी. रुड़की के प्रो0 अनिल गुप्ता, द एशिया फाउण्डेशन की निदेशक डा0 नन्दिता बरुआ, कृषि व नीति विशेषज्ञ डा0 देवेन्द्र शर्मा समेत अनेक ख्यातिलब्ध स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ व किसान भाग लेंगे।
इस अवसर पर गोरखपुर एन्वायरन्मेंटल एक्शन ग्रुप की 50 वर्षों की हरित यात्रा पर ‘काफी टेबुल बुक’ का विमोचन भी किया जायेगा।
समारोह का प्रारंभ 15 नवंबर को सुबह 9.30 बजे से होगा। समारोह के उद्घाटन सत्र में महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो पूनम टंडन का उद्बोधन होगा। इसके बाद दोपहर 12.30 बजे सेंटर फार साइंस एण्ड एनवायरन्मेन्ट की महानिदेशक पद्मश्री डा0 सुनीता नरायन मुख्य वक्तव्य देंगी।
जी0ई0ए0जी0 के अध्यक्ष डा0 शीराज वजीह ने बताया कि गोरखपुर एन्वायरन्मेंटल एक्शन ग्रुप का गठन विद्यार्थियों, युवाओं व शोध छात्रों द्वारा सन् 1975 में गोरखपुर विश्वविद्यालय के इकालोजी लैब में प्रो0 राजेन्द्र सहाय की अध्यक्षता में किया गया था। संस्था का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जन-जागरुकता के साथ युवाओं व नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के कार्यों हेतु उत्प्रेरित करने का था। पिछले पाँच दशकों में संस्था ने पर्यावरण के विभिन्न मुद्दों पर जमीनी कार्य करते हुए राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है।

आरम्भिक दौर में संस्था ने पूर्वी उत्तर प्रदेश और विशेषतः गोरखपुर के आस-पास के क्षेत्रों में लघु सीमान्त व महिला किसानों को पर्यावरण सम्मत खेती हेतु प्रेरित किया और खेती में जैव विविधता, रसायन रहित जैव कीटनाशक व जैव खादों के इस्तेमाल से अपनी छोटी जोत की खेती में लागत कम करने व आय बढ़ाने के प्रभावी कार्य किये जिसे अपना कर हजारों किसानों ने खेती के माॅडल को स्थापित किया और अन्य किसानों को उत्प्रेरित किया। अनेक किसान- किसान प्रशिक्षक के रुप में विकसित हुए। 1980 व 1990 के दशक में किये गए इन कार्यों को आज राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जल प्रबन्धन व बाढ़ जल जमाव के साथ जीवन यापन व आजीविका सुधार हेतु संस्था ने शोध व तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक तकनीकी एजेन्सी के रुप में पहचान स्थापित की तथा राष्ट्रीय व राज्य सरकारों को सहयोग दिया। जलाशयों के संरक्षण हेतु संस्था ने विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में जमीनी कार्य किया और 50 से अधिक वेटलैण्ड को संरक्षित करने में अपना विशिष्ट योगदान दिया।
जलवायु परिवर्तन पर एशिया स्तर पर 2004 में जारी अन्तर्राष्ट्रीय रिर्पोट में सह-लेखक के रुप में योगदान दिया तथा एशिया स्तर पर चयनित नगरों में जलवायु अनुकूलन हेतु नियोजन व रणनीति निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शहरों के अस्तित्व व सुरक्षा हेतु आस-पास के पेरी अर्बन क्षेत्रों की भूमिका पर व्यापक अध्ययन तथा इससे संबंधित नीतियों को बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। संस्था को संयुक्त राष्ट्र ने 2013 में पोलैण्ड में ‘लाइट हाऊस’ पुरस्कार से सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि संस्था ने सदैव सहभागी विकास पर बल दिया है और समाज के वंचित व न्यून सुविधा प्राप्त लोगों को साथ लेकर उनकी आवश्यकताओं व वरीयताओं के आधार पर कार्य किया है। विगत पाँच दशकों में संस्था को अन्तर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी व संसाधन एजेन्सी के रुप में पहचाना गया है।
