गोरखपुर। भाकपा (माले) ने शीतकालीन सत्र में मनरेगा कानून को बदलकर लाये गये नये कानून को किसान व मजदूर विरोधी बताते हुए इसका तीखा विरोध करते हुए जन विरोधी कानूनों के खिलाफ जन संघर्ष तेज करने की बात काही है।
भाकपा माले की गोरखपुर में 20-21 दिसंबर को चल रही बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा गया कि कहां तो मनरेगा को कृषि क्षेत्र को सहयोग करने के लिए मनरेगा को और सशक्त करने, उसका बजट बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी के साथ साल में न्यूनतम दो सौ दिन काम की गारंटी जरूरत थी किन्तु भाजपा ने इसे बदलकर ग्रामीण गरीबों के लिए बने एकमात्र कानून को ही कमजोर कर दिया। इसके पहले कारपोरेट जगत की मदद के लिए श्रम कानूनों को बदलकर चार श्रम संहिताओं को थोपकर मजदूर वर्ग पर सीधा बड़ा हमला किया है। यही नही योगी का बुल्डोजर आदिवासियों गरीबों को बेघर व जीवन के मौलिक को खत्म कर रहा है।

भाकपा माले ने दलितों व महिलाओं पर बढ़ते हमलों गहरी चिंता जताई है और कहा कि योगी सरकार में सामंती सोच वाले अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पार्टी ने संविधान, लोकतंत्र की रक्षा व पुनर्वास, आजीविका व रोजगार के लिए जनांदोलन तेज करने का फैसला किया है। इसके लिए पार्टी तमाम लोकतांत्रिक शक्तियों से एकता व संघर्ष के लिए पहलकदमी तेज करेगी।
पार्टी की बैठक में भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड रामजी राय, राज्य सचिव सुधाकर यादव, केंद्रीय सदस्य व किसान महासभा के राज्य सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, केन्द्रीय कमेटी सदस्य व अखिल भारतीय खेत-मजदूर व ग्रामीण सभा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीराम चौधरी, केंद्रीय कमेटी सदस्य व ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी, खेग्रामस के राज्य सचिव कामरेड राजेश साहनी, किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण, भाकपा (माले) गोरखपुर के जिला सचिव राकेश सिंह, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष, इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य , इंसाफ मंच के प्रदेश संयोजक अफरोज आलम सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से राज्य कमेटी सदस्य इस बैठक में शामिल हैं। बैठक में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों पर भी व्यापक चर्चा होगी।
