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‘ शमीम इकबाल ने न्याय की लड़ाई को जीवन का मिशन बनाया था ’

देवरिया। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं कानून पीड़ित न्याय मंच के संस्थापक शमीम इकबाल की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा यक आयोजन 28 दिसम्बर को जिला पंचायत सभागार में आयोजित किया गया। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने उनके द्वारा लोगों को न्याय दिलाने के लिए किये गए संघर्ष को याद किया।

शमीम इकबाल का 25 नवम्बर को लखनऊ में निधन हो गया था।

कानून पीड़ित न्याय मंच द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में समाजसेवी, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि  सामाजिक कार्यकर्ता एकत्र हुए। शमीम इकबाल के परिजन भी उपस्थित थे।

श्रद्धांजलि सभा में जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह ने शमीम इकबाल को याद करते हुए कहा कि वे मजलूमों और पीड़ितों की पूरे जीवन मदद करते रहे। उन्होंने सूचना अधिकार कानून की मदद से सैकड़ों लोगों को उनका अधिकार दिलाया। वे सूचना के अधिकार के माध्यम से सूचनाएं निकालते और उसका उपयोग मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करा कर और अदालतों में वाद दर्ज कर न्याय की लड़ाई लड़ते। उन्होंने ग्रामीणों को ठगने वाले कई फर्जी संस्थाओं और गिरोहों का पर्दाफाश किया और उन्हें कानून के शिकंजे में ले आए।

श्री सिंह ने कहा कि शमीम इकबाल के लिए न्याय की लड़ाई जीवन का मिशन था। उन्होंने निडरता के साथ इस कार्य को किया। उन्होंने अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा नहीं पीटा और न पद , सम्मान की कोई अपेक्षा की। ऐसे मानवाधिकार कार्यकर्ता विरले ही होते हैं। देश -समाज के प्रश्नों पर वह बेबाक बोलते थे। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाना ही शमीम  इकबाल को सही श्रद्धाजंलि होगी।

वरिष्ठ पत्रकार एवं गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि शमीम इकबाल को अन्याय बर्दाश्त नहीं होता था। वे अन्याय देख चुप रहने वाले व्यक्ति नहीं थे। वे तुरंत न्याय के पक्ष में खड़े हो जाते थे।

किसान नेता शिवाजी राय ने कहा कि निर्बल और कमजोर के साथ खड़ा होना आसान नहीं होता। इसके लिए अपना पूरा जीवन लगाना पड़ता है। शमीम इकबाल ने ऐसा ही किया।

राणा विश्व विक्रम सिंह ने उन्हें एक दिव्य आत्मा और युग पुरुष बताया।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे कानून पीड़ित न्याय मंच के सचिव एडवोकेट अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि शमीम इकबाल गरीबों, मजलूमों और पीड़ितों के मसीहा थे। उन्होंने फर्जी पोंजी कंपनियों के खिलाफ अभियान चलाकर लाखों लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया। उन्होंने कानून पीड़ित न्याय मंच की स्थापना कर सूचना अधिकार, मानव अधिकार कानूनों और रिट याचिकाओं के माध्यम से अनगिनत पीड़ितों की मदद की।

सभा को पूर्व सभासद राजेश कुशवाहा, सुबाष राय, अनिल राय, आनन्द प्रकाश चौरसिया, विष्णु प्रकाश गुप्ता, हरेन्द्र पाल, चतुरानन्द ओझा, अरविन्द गिरी, नेसार अहमद, नूर आलम, पंकज जायसवाल, मृत्युंजय विशारद, राजीव श्रीवास्तव, दिव्यांश श्रीवास्तव और गौरव शाही सहित कई अन्य लोगों ने संबोधित किया।

श्रद्धांजलि सभा में शमीम इकबाल के परिजन नेसार अहमद, जेबा सगीर, तारा, फायजा, मलक, सत्येन्द्र पाल, सभासद जावेद आलम, पूर्व सभासद अजय कुमार गुप्ता, पवन कुमार शर्मा, रविप्रताप सिंह, विजय जुआठा, इस्लामुद्दीन, बंटी तोगड़िया, सहाबुद्दीन, हैदर अली, डॉ. संजय कुमार, डॉ. अचल पुलस्तेय, अनस खान, असमतुल्लाह खान, फरहान खान, संदीप राजभर, कुमार रंजन, आशीष साहनी, अली अहमद, आशुतोष कुमार शुक्ला, सलीम अंसारी, राकेश पटेल, शमीउल्लाह, लालू भाई, उमेश प्रसाद, बालेन्द्र शर्मा, वेदान्त, धर्मवीर पाण्डेय, सच्चिदानन्द पाण्डेय, मुख्तार अहमद, दयानन्द चौहान और बेचू चौहान सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

 

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