लखनऊ। नागरिकों, छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आज 13 वर्षीय उनैज खान की हत्या के खिलाफ लखनऊ के परिवर्तन चौक पर एकत्रित होकर प्रतिरोध दर्ज किया और मामले की निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
प्रतिरोध में पूर्व कुलपति प्रो रूपरेखा वर्मा (साझी दुनिया), मधु गर्ग (AIDWA), सरोजिनी बिष्ट और मीना सिंह (AIPWA), कांती मिश्रा (महिला फेडरेशन), ग्रुप कैप्टन दिनेश चंद्र (सेवानिवृत्त) – ह्यूमैनिटी एसोसिएशन, फरजाना मेहदी और सुचित माथुर (जन संस्कृति मंच), अहमद रजा खान (छात्र, लखनऊ विश्वविद्यालय), शांतम निधि (AISA), शुभम आहाके (BAPSA, BBAU), नम्रता गौतम (People for Caste Annihilation), सौन्यजीत भट्टाचार्य, हर्ष तीर्थानी, सनी सिंह और करुणा निदान (AISF) तथा दीपांकर (BSM) सहित कई सामाजिक और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिक शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि एक मासूम बच्चे की इस तरह हुई मृत्यु ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि घटना के बाद जिस प्रकार से जांच की दिशा तय की जा रही है और पुलिस द्वारा बार-बार इसे “आकस्मिक गोलीबारी” बताया जा रहा है, उससे निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मुख्य आरोपी संजीव त्रिपाठी की अब तक गिरफ्तारी न होना, फोरेंसिक तथ्यों के स्पष्ट होने से पहले ही घटना को “आकस्मिक” बताना तथा जांच की प्रक्रिया में सामने आ रही कई चूकों ने न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा किया है। उन्होंने कहा कि यदि 13 वर्षीय बच्चे की मृत्यु के मामले में भी पूरी जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तो यह कानून के शासन और नागरिकों के विश्वास दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रतिरोध के दौरान पुलिस आयुक्त को संबोधित एक ज्ञापन भी दिया गया, जिसमें घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए। ज्ञापन में पूछा गया कि परिवार को अस्पताल में बच्चे तक पहुंच से क्यों रोका गया, बिना पूरी जांच के घटना को आकस्मिक गोलीबारी क्यों बताया गया, और मुख्य वयस्क आरोपी की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं की गई।
ज्ञापन के माध्यम से नागरिकों और संगठनों ने मांग की कि संजीव त्रिपाठी सहित एफआईआर में नामित सभी वयस्क आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, पोस्ट-मार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, घटना स्थल से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर अदालत में प्रस्तुत किए जाएं, तथा जिन पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी मांग की गई कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी जाए ताकि पूरी निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
वक्ताओं ने कहा कि एक बच्चे के जीवन की गरिमा और न्याय के प्रश्न पर समाज को चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल उनैज खान के लिए न्याय का प्रश्न नहीं है, बल्कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक जवाबदेही की रक्षा का भी प्रश्न है।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती, तब तक नागरिक समाज अपनी आवाज उठाता रहेगा।
