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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वन ग्रामों की महिलाओं ने हक की आवाज बुलंद की

बहराइच। बहराइच के मोतीपुर तहसील अंतर्गत गिरिजापुरी स्थित सेवार्थ फाउंडेशन ट्रस्ट के कार्यालय में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया जिसमें क्षेत्र की ग्रामीण और वनवासी महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। विभिन्न वनग्रामों जैसे भवानीपुर बिछिया, टेडिया, ढकिया आदि से राजस्व ग्राम बने गांवों की महिला नेताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में वन अधिकार कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने कहा कि यह दिन केवल महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव ही नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्षों की याद दिलाने वाला भी है। यह हमें सशक्तीकरण की दिशा में प्रतिबद्धता मजबूत करने का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि बताया कि 1900 के दशक से शुरू हुई यह वैश्विक परंपरा आज दुनिया भर में लैंगिक समानता का प्रतीक बन चुकी है।

सामुदायिक नेता फगुनी प्रसाद ने कहा कि महिलाओं को पुरुषों जैसी बनने की कोई आवश्यकता नहीं। वे अपनी भावनाओं, संवेदनाओं और अद्भुत क्षमताओं से ही पूर्ण और अद्वितीय हैं। मां, बहन, पत्नी और बेटी के रूप में वे परिवार व समाज को संभालती हैं तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।

राम समुझ मौर्य ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत की महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक विकास तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, सरोजिनी नायडू की काव्यात्मक नेतृत्व, कल्पना चावला की अंतरिक्ष यात्रा और इंदिरा गांधी की राजनीतिक दृढ़ता का जिक्र किया। इन महिलाओं का योगदान इतिहास के पन्नों में अमर है, जो हमें प्रेरित करता रहता है।

समाजसेवी बच्चे लाल ने संवैधानिक अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), 15 (भेदभाव का निषेध) और 16 (सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर) लैंगिक समानता की गारंटी देते हैं। उन्होंने बहराइच जैसे ग्रामीण और वन क्षेत्रों की वास्तविकता पर रोशनी डाली, जहां महिलाएं खेती, वन संरक्षण और पारंपरिक चिकित्सा में अग्रणी हैं, परंतु शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है।

महिला नेता मीरा देवी ने स्थानीय चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं में 50 प्रतिशत से अधिक एनीमिया की समस्या व्याप्त है। इसके अलावा घरेलू हिंसा, बाल विवाह और कार्यस्थल पर भेदभाव जैसी समस्याएं अभी भी आम हैं। उन्होंने जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया। दीपक यादव ने पर्यावरणीय संदर्भ जोड़ते हुए चेतावनी दी कि वन निवासी महिलाओं के लिए जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि उनकी आजीविका जंगलों पर निर्भर है। वनों की कमी से उनकी पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित हो रही है।

कार्यक्रम में सेवार्थ फाउंडेशन ट्रस्ट की महिला स्वयंसेविकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

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