महराजगंज। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले के गांवों व कस्बों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की यात्रा के समापन के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आठ मार्च को कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर सर्वहितकारी सेवाश्रम ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त महराजगंज एवं संतकबीर नगर और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करते के बेहद करीब हैं।
सर्वहितकारी सेवाश्रम बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।
जिले में बाल विवाह मुक्ति रथ को जिलाधिकारी संतोष शर्मा और जिला विधिक प्राधिकरण सचीव सुनील नागर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इन 15 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ ने जिले में 1260 किलोमीटर यात्रा की। यह रथ 327 गांवों तक पहुंचा और 38000 लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा।
‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार दिसंबर, 2025 को देशव्यापी ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ का एलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की मोर्चे से अगुआई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले। इस रथ ने जिले के तमाम गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। प्रमुख सड़कों और बेहतर पहुंच वाले मार्गों से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ गुजरे, जबकि संपर्क के लिहाज से मुश्किल सुदूर गांवों तक मोटरसाइकिल व साइकिल कारवां के जरिए पहुंचा गया ताकि बाल विवाह मुक्त महराजगंज का संदेश सबसे आखिरी छोर तक पहुंच सके।

सर्वहितकारी सेवाश्रम के निदेशक विनोद तिवारी ने बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा, “यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित-पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।”
उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक व्यापक जनभागीदारी वाले जन अभियान में तब्दील हो गया। सभी के सहयोग से बाल विवाह के खात्मे के लिए कानून, सुरक्षा और जवाबदेही के संकल्प को हम जनसमुदाय तक ले गए ताकि बाल विवाह मुक्त महराजगंज का लक्ष्य वास्तविकता में बदल सके।

तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इनकार करें। साथ ही, कैटरर्स, सजावट वालों, बैंक्वेट हाल मालिकों व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड वालों, घोड़ी वालों से संपर्क कर अनुरोध किया गया कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं नहीं दें क्योंकि बाल विवाह में किसी भी रूप में शामिल होने या सहयोग देने पर उन्हें सजा हो सकती है। तीसरे चरण में जिले की पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया।
