गोरखपुर। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ग्रामीण निगरानी समितियों में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आशा बहुओं, ग्राम सेवकों, रोजगार सेवकों और ग्राम विकास अधिकारियों ने अपने जीवन को खतरे में डालकर उतनी ही ईमानदारी, निष्ठा और त्याग-तपस्या के साथ काम करके जीवन की रक्षा की, जितना देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक अपने जीवन को खतरे में डालकर करते हैं। उनके आपके सहयोग से ही कोरोना के दूसरी लहर पर नियंत्रण किया गया है और अगर तीसरी लहर आई तो वे उसका डटकर मुकाबला करेंगे।
नगर विधायक एवं शिशु-रोग विशेषज्ञ डा राधा मोहन दास अग्रवाल ने ये बातें रविवार को चरगावां ब्लाक के ग्राम-पंचायतों की निगरानी समिति के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए तथा उन्हें चिकित्सा किट वितरित करते हुए कही।
नगर विधायक ने कहा कि शायद ही देश के किसी प्रदेश में कोरोना की सम्भावित तीसरी लहर के खिलाफ इतने जमीनी स्तर पर तैयारी हो रही हो। निगरानी समिति के सदस्यों को अपने पंचायत के सभी गांवों, टोलों और मजरों पर पैनी नजर रखनी होगी और बीमारी का पहला लक्षण मिलते ही उन्हें चिकित्सा – किट देने होंगे और उनका फालो-अप करके यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें समय रहते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पंहुचा दिया जाये।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि एक साल से छोटे बच्चों को सरकार पैरासिटामोल तथा मल्टीविटामिन ड्राप और ओरल रिहाईड्रेशन सलूसन के दो पैकेट, 1-5 साल के बच्चों के लिए ड्राप की जगह सिरप और 5-12 साल के बच्चों के लिए इनके अतिरिक्त आईवरमेक्टिन की 6 मिग्रा की तीन टैबलेट उपलब्ध कराई जा रही है। बच्चों में कोरोना के नान-स्पेसिफिक लक्षण होंगें। सर्दी, खांसी, बुखार, सांस फूलने के अतिरिक्त दस्त-उल्टी, सुस्ती, दूध कम पीना, खाना कम खाना या खेलने में अरुचि आदि सभी कोविड के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए हर बीमार बच्चे को कोरोना समझकर चिकित्सा-किट उपलब्ध करा देनी होगी। बच्चे संवेदनशील होते है। हर लक्षण बच्चो में हो सकते है। यह जो दवा का किट वितरित किया जा रहा है वह तीसरी लहर की रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश सरकार ने समय पूर्व हर स्तर पर तैयारी का सबसे बडा कदम उठाया है। बीमारी से लडने की क्षमता जिसके अंदर कम होगी वह ज्यादा प्रभावित होगा। प्रभावित सबसे ज्यादा बच्चे ही होंगे, यह धारणा गलत है। यदि बचाव के उपाय टीकाकरण, सोशल डिस्टेंस, मास्क के प्रयोग का पालन नही होगा तो संभावित तीसरी लहर मे लापरवाही बरतने वाले वयस्क की बजह से बच्चो को ज्यादा प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि एएनएम,आशा, आँगनबाड़ी जड़ों तक पहुँच कर काम करती है। इनके ऊपर गांव की जनता किसी भी जनप्रतिनिधि से ज्यादा विश्वास करती है, क्योंकि छोटे बच्चों के टीकाकरण, बीमार पडने पर तत्काल स्वास्थ्य सुविधाऑन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम को मुख्य चिकित्साधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा,स्वास्थ्य शिक्षा अधीकारी मनोज कुमार,एडीओ पंचायत एसके वर्मा संवोधित किया।
इस अवसर पर चिकित्साधिकारी डा० मनोज मिश्रा, डा०पवन, ग्राम विकास अधिकारी राजेश गुप्ता , वकील कुमार, बीसीपीएम चन्द्रशेखर यादव, एएनएम प्रेमलता, मुन्नी,मीना,शारदा, सहित नरायनपुर, जंगल एकला, सरैया, जंगल छत्रधारी की निगरानी समिति, ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक उपस्थित रहे ।
