इस वर्ष 226 दिन में 185 की मौत, अगस्त माह के 23 दिन में 80 ने दम तोड़ा
गोरखपुर, 23 अगस्त। प्रदेश और केन्द्र सरकार के हर दावे और दौरे बुरी तरह फेल साबित हुए हैं। इंसेफेलाइटिस से मौतें रोज ब रोज बढ़ती जा रही है। सोमवार की दोपहर से मंगलवार की दोपहर तक इंसेफेलाइटिस ने 8 बच्चों सहित 10 की जान ले ली। इस वर्ष 24 घंटे के भीतर यह सर्वाधिक मौतें थीं। अगस्त माह के 23 दिनों में 80 लोगों की इस बीमारी से जान चली गई। यही हालात रहे तो यह वर्ष एक दशक के बाद इंसेफेलाइटिस से मौतों का के लिए सबसे बुरा वर्ष साबित होेगा।
पिछले 24 घंटे में 23 मरीज भर्ती हुए और दस की जान गई। यानि हर घंटे पर एक मरीज भर्ती हुआ और ढाई घंटे के भीतर एक मरीज की मौत हुई। भर्ती होने वाले मरीजों में सभी बच्चे हैं।मंगलवार को गोरखपुर के सहजनवां के साबित अली (70), देवरिया के सत्येंद्र तिवारी (37), बिहार गोपालगंज नसरुल्लाह (12), कुशीनगर के अहिरौली के अनन्या (6) पुत्र व्यास, बेलीपार के धीरेंद्र (15) पुत्र मुल्लुर, शाहपुर के रौनक निषाद (14) पुत्र बाबूराम, खजनी की नैनसी (1) पुत्री सुनील, नौगढ़ की तरन्नूम (1) पुत्री रियाज अहमद, देवरिया सलेमपुर के भोला विश्वकर्मा (19 माह) पुत्र बमनौली पांडेय, बेलीपार के आर्यन (8) पुत्र अनीस की मौत हो गई।
इसके साथ ही एक जनवरी से 23 अगस्त तक इंसेफेलाइटिस से मौतों की संख्या 175 पहुंच गई। इस वर्ष अब तक 667 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं।
इस वर्ष मृत्यु दर भी काफी बढ़ गई है और यह 26.3 फीसदी तक पहुंच गई है जबकि वर्ष 2015 में यह 20 फीसदी ही थी।
मेडिकल कालेज के नेहरू चिकित्सालय इंसेफेलाइटिस से अपने बच्चों को खो देने वाले परिजनों को क्रन्दन से गूंज रहा है। इंसेफेलाइटिस के लिए बना 100 बेड का वार्ड हो या वार्ड संख्या 12 और 14, इंसेफेलाइटिस मरीजों से भरा पड़ा है। एक-एक बेड पर दो से तीन बच्चे पड़े। बाहर गैलरी और खुले जगहों पर परिजनाों की भीड़ है जिनके हाथ अपने बच्चों के लिए लगातार प्रार्थना में जुड़े हैं।
[tabs type=”horizontal”][tabs_head][tab_title]इंसेफेलाइटिस से बीआरडी मेडिकल कालेज में मौत (2005-2016)[/tab_title][/tabs_head][tab]2005 2006 2007 2008 2009 2010 2011 2012 2013 2014 2015 2016
311 138 91 185 199 210 204 210 203 250 134 185 [/tab][/tabs]