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पुस्तक ‘ पसमांदा आंदोलन 1998 ’ का लोकार्पण

गोरखपुर। शहीद भगत सिंह डॉ अम्बेडकर मंच और सावित्री बाई फुले जन साहित्य केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में 26 अप्रैल को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के क्षेत्रीय कार्यालय पर पसमांदा लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता मुख्तार अंसारी की पुस्तक ‘ पसमांदा आंदोलन 1998 ‘ का लोकार्पण और विचार गोष्ठी कार्यक्रम  आयोजित किया गया।

विचारगोष्ठी में अपने विचार साझा करते हुए लेखक साथी मुख्तार अंसारी ने कहा कि ऊपर से देखने में मुस्लिम समाज में जाति आधारित गैर बराबरी नहीं दिखती परन्तु अंदरखाने में जाति की परतें हिंदू समाज से भी गहरी हैं और तथाकथित अशराफ वर्ग इसे अपने निहित स्वार्थों हेतु आगे नहीं आने देता। शिक्षा,सरकारी नौकरी,राजनीति में अर्जाल कौम की नुमाइंदगी न के बराबर है।

सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धेश ने कहा कि सिर्फ प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के शिगूफे का हश्र जो होना था हो चुका, बदलाव का अब आगे का रास्ता क्या हो यह महत्वपूर्ण सवाल है।

जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय समाज में तमाम ऐसे समुदाय हैं जो न हिन्दू हैं न मुसलमान, नट, जोगी सहित कई समुदाय सही मायनों में धर्मनिरपेक्ष जीवन जीती हैं लेकिन आज उनके बीच भी धार्मिक विभाजन किया जा रहा है। पसमांदा आंदोलन को विभाजन की इस राजनीति से सचेत रहना होगा।

प्रो असीम सत्यदेव ने कहा कि पसमांदा कहें या दलित मूल समस्या हिन्दू और मुस्लिम दोनों समाज में साधन संसाधन विहीनता का ही है। जो लोग भौतिक संपदा के मालिक हैं,बौद्धिक संपदा भी उन्हीं के कब्जे में है। तुफैल हुसैन ने कहा कि पसमांदा समाज भी शादी अपनानी जाति में करते हैं। अशिक्षा बहुत बड़ी समस्या है।

गोष्ठी में साथी प्रदीप, संतोष, श्रवण आदि ने अपने विचार साझा किए। गोष्ठी का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता इमामुद्दीन ने तथा धन्यवाद ज्ञापन आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के जे एन शाह ने किया।