गोरखपुर। नागरिक समाज गोरखपुर के तरफ़ से आज जिला अधिकारी कार्यालय पर वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा और दिशा छात्र संगठन की कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा रासुका लगाए जाने पर प्रतिवाद सभा किया गया और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए धर्मराज ने कहा कि नोएडा में आधुनिक प्रकार की बंधुआ प्रथा के ख़िलाफ़ चले स्वतःस्फूर्त श्रमिक आन्दोलन पर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे दमन ढाया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार, अनुवादक व सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सत्यम वर्मा तथा थियेटर आर्टिस्ट आकृति चौधरी के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई है। इन गिरफ्तारियों के सम्बन्ध में न्यायालय में नोएडा पुलिस प्रशासन समुचित उत्तर और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पायी है, यहाँ तक कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी पुलिस हिरासत में किए जा रहे बर्बर दमन पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया गया है। इसके बावजूद सम्बन्धित व्यक्तियों को जेल में बनाए रखने के उद्देश्य से रासुका की कार्रवाई की गई प्रतीत होती है।

सभा में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संपूर्णानंद मल्ल ने कहा की लखनऊ स्थित जनचेतना पुस्तक प्रतिष्ठान व पुस्तकालय पर बिना वारण्ट व विधिक प्रक्रिया के छापेमारी कर सत्यम वर्मा को लखनऊ से अगवा किया गया तथा दो दिन बाद न्यायालय में पेश किया गया और उनकी गिरफ़्तारी नोएडा से दिखाई गई। बोटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से आकृति, रूपेश, सृष्टि सहित अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी की गई। इन गिरफ्तारियों की सच्चाई बयां करने वाली सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है, जिन्हें अदालत के संज्ञान में भी लाया गया है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनन्द समेत अनेक गिरफ़्तार व्यक्तियों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की घटनाएँ भी सामने आई है। वर्तमान में सैकड़ों मज़दूर जेलों में बन्द हैं और उनके परिवार न्याय की तलाश में भटक रहे हैं।

सभा में भाकपा माले के जिला सचिव राकेश सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा 17 अप्रैल 2026 के नोटिफिकेशन में यह स्वीकार किया गया कि 2019 एवं 2024 में न्यूनतम मज़दूरी का वेज रिवीजन नहीं किया गया, जो श्रमिक असंतोष का प्रमुख कारण रहा। बाद में न्यूनतम वेतन में 21 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा भी की गई। इससे स्पष्ट है कि नोएडा श्रमिक आन्दोलन के पीछे कोई बाहरी या राष्ट्रविरोधी तत्व नहीं, बल्कि प्रशासनिक व नीतिगत विफलताएँ ज़िम्मेदार हैं। सत्यम वर्मा एक पत्रकार, सार्वजनिक बुद्धिजीवी, सम्पादक और अनुवादक है। उन्होंने यूनिवार्ता में कई वर्ष काम किया. वे ‘भगत सिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़’ की ऐतिहासिक कृति के सम्पादक हैं। वे जनपक्षधर बुद्धिजीवी रहे हैं, जिन्होंने हमेशा लोगों के न्यायसंगत संघर्ष के साथ एकजुटता दिखाई और अन्याय के ख़िलाफ़ असहमति की मजबूत आवाज़ बने। आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर्स और दौलत राम कॉलेज से ग्रेजुएट है। इन पर एनएसए लगाना व्यक्ति की गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के संवैधानिक अधिकार का हनन है।

जिला प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में सत्यम वर्मा एवं आकृति चौधरी पर लगाए गए एनएसए को तत्काल वापस लेने, नोएडा श्रमिक आन्दोलन पर चल रहे दमन पर तत्काल रोक लगाने, सभी मज़दूरों तथा सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करने, मज़दूरों को तात्कालिक राहत प्रदान करते हुए न्यूनतम वेतन ₹26,000 सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
सभा में नागेंद्र, डॉ.संपूर्णानंद मल्ल, बैजनाथ मिश्र, उदयभान, विनय, आशीष, लवकुश, अम्बरीष,आदेश आकाश और धर्मराज उपस्थित रहें।
