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जीएसटी डे पर व्यवस्था को और पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई

गोरखपुर। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर मण्डल-प्रथम एवं द्वितीय गोरखपुर की ओर से ंआज जीएसटी दिवस पर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर मण्डल प्रथम के सभागार में “ सुगम कर व्यवस्था , सशक्त भारत “ विषय पर संवाद का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर के अधिकारी, व्यापार व वाणिज्य संघों के प्रतिनिधि, चार्टड एकाउंटेट, अधिवक्ता सहित समाज के विभिन्न तबकों के लोग शामिल हुए। संवाद में जीएसटी के संबध में आने वाली समस्याओं और उसके समाधान पर चर्चा हुई।

व्यापार व वाणिज्य संघ के प्रतितिनिधयों की कुछ शिकायतें राज्य जीएसटी से संबधित थी। जीएसटी पोर्टल की दिक्कतों, जीएसटी सबंधित दिशा-निर्देशों की अधिकता, नोटिस को ईमेल व मैसेज के अलावा डाक से भेजने को लेकर भी चर्चा हुई।
चेम्बर आफ कामर्स के जुडे संजय सिंघनिया ने कहा कि समाधान योजना का दायरा पांच करोड़ तक बढ़ाया जाना चाहिए। इससे व्यापारियों का उत्पीड़न कम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार व वाणिज्य संगठनों की ओर से की जाने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करने की मांग की।

व्यापार मंडल के पदाधिकारी नवीन कुमार चौरसिया ने कहा कि व्यापारियों से जीएसटी अधिकारियों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए। संवाद से समास्याओं को जानने और उसका समाधान करने में आसानी होती है।

केन्द्रीय जीएसटी डिवीजन द्वितीय के अधीक्षक एलबी प्रसद ने कहा कि सरकार और विभाग की ओर से जीएसटी की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है। सीधे फीडबैक की व्यवस्था बनायी गई है और फीडबैक के आधार पर व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारी जीएसटी-R1 रिटर्न समय से और सही से भरा जाय। पाँच करोड़ से ऊपर के टर्नओवर वाले ई इनवॉइस जरूर जारी करें। उन्होंने कहा कि जालसाजों द्वारा फर्जी नोटिस भेजने की बात संज्ञान में आयी है। विभाग की ओर से बिना डिन के नोटिस नहीं भेजी जाती है। व्यापारी इसको लेकर सर्तक रहें।

सीए हिमांशु टिबड़ेवाल ने कहा कि गोरखपुर मूलतः ट्रेडर्स का शहर है। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को बहुस्तरीय टैक्स से मुक्ति मिली है। अब उन्हें कई विभागों के बजाय एक ही विभाग से वास्ता पड़ता है। जीएसटी लागू होने के नौ वर्ष बाद स्थिति काफी बेहतर हुई है। रीफंड आसान हो गया है लेकिन कुछ और सुधार की जरूरत है। जीएसटी की व्यवस्था संबधी दिशा-निर्देश बहुत हैं। पिछले नौ वर्ष में ढाई हजार दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। इससे जीएसटी दाताओं व प्रोफेशनल को दिक्कत आती है। अभी भी दस्तावेजों का चक्कर बहुत ज्यादा है। छोटे और मझोले बिजनेसमैन के लिए यह सब कर पाना भारी बोझ साबित होता है। कई बार लोड बढ़ जाने पर जीएसटी पोर्टल में दिक्कत आती है। पोर्टल को और ज्यादा यूजर फ्रेंडली बनाने की जरूरत है।

केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर के रिटायर अधीक्षक अतुल श्रीवास्तव ने विस्तार से जीएसटी के दरों से लगायत अन्य बदलावों के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग में स्टाफ की कमी है। इसलिए कई बार कार्यों में विलम्ब होता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी संवधी विवादों में दस्तावेज ही सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। इसलिए व्यापारियों को दस्तावेज को दुरूस्त रखना चाहिए और नोटिस का जवाब देने में विलम्ब नही करना चाहिए। उन्होंने अनुमान आधारित नोटिसों की बढ़ती संख्या से उत्पन्न समस्या का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अस्टिेंट प्रोफेसर आनंद पांडेय ने प्राचीन कर व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि वही कर व्यवस्था अच्छी मानी जाती है जैसे मधुमक्खी फूलों से जरूरत भर का शहद लेती है। वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह ने कहा कि देशा का साधारण व्यक्ति ही सबसे ज्यादा टैक्स देता है लेकिन उसे इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में जन साधारण से जितना अधिक संवाद होगा वह व्यवस्था में अपनी भूमिका को ज्यादा प्रभावी तरीके से निभायेगा।

कार्यक्रम के आखिर में सहायक आयुक्त केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर डिवीजन प्रथम पंकज मिश्र ने सवालों के जवाब दिए और कहा कि विभाग समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। जो सुझाव आए हैं उनको वरिष्ठ अधिकारियों से अवगत कराया जाएगा और हर संभव समाधान का प्रयास होगा। उन्होंने व्यापार व वाणिज्य संगठनों के प्रतिनिधियों, प्रोफेशनल, टैक्स अधिवक्तओं के बीच संवाद को और संघन करने की जरूरत पर जोर दिया।

इस मौके पर सहायक आयुक्त कस्टम, गोरखपुर केएन सिंह, सहायक आयुक्त केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर डिवीजन दो अशोक जायसवाल सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।