साहित्य - संस्कृति

समतामूलक समाज के लिए पूंजीवाद खतरा है : रणेंद्र

मऊ। जन संस्कृति मंच के बैनर तले राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ, मऊ में ‘ संवाद ‘ कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका विषय था ’21वीं सदी में पूंजीवाद का बदलता स्वरूप और श्रम आधारित समुदायों पर इसका प्रभाव।’

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मशहूर कथाकार रणेंद्र ने कहा कि आधुनिक दौर के कवियों और कथाकारों की रचनाओं से मजदूर निरंतर गायब होता जा रहा है। आज टेक्नो सामंतवाद फिर से सामंतवाद के रूप में आ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सर्विलांस कैपिटलिज्म का दौर आ रहा है। पूंजीवाद मजदूर शब्द से ही नफरत करता है और अपनी नई गढ़ी हुई परिभाषाओं से मजदूर को अदृश्य कर देना चाहता है। आज का सबसे बड़ा संकट यह है कि पूंजीवाद नई चालाकियों से हमारी सोच का शोषण कर रहा है। हमें इससे सतर्क रहना होगा और समतामूलक समाज की स्थापना करने के लिए इन चुनौतियों का सामना मजबूती से करना होगा।

जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि जनता का लगाव श्रमिक वर्ग के साथ कम हुआ है। जब श्रमिकों का राजकीय दमन हुआ तो समाज से प्रतिरोध की आवाज उस सत्र पर नहीं आई जिसकी अपेक्षा थी। आज साम्राज्यवाद भी नए स्वरूप में उभर कर आ रहा है। नए दौर का साम्राज्यवाद खुलमखुल्ला सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संस्थाओं की अवहेलना कर रहा है। वे अमेरिका। इजरायल और उसके सहयोगी देश संप्रभु राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों की हत्या कर रहे हैं, उनका अपहरण कर रहे हैं , नागरिकों  का संहार कर रहे हैं।  पूंजीवाद और साम्राज्यवाद सहोदर हैं।

 प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव और रंगकर्मी विनीत तिवारी ने मणिपुर और फिलिस्तीन के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि पूंजीवादी व्यवस्था का कभी न बदलने वाला स्थाई तत्व है मुनाफा। वर्तमान दौर के शोषण से समाज को बचाने के लिए बदलते हुए पूंजीवाद के स्वरूप को समझना जरूरी है।

राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के संस्थापक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जयप्रकाश धूमकेतु ने कहा कि पूंजीवाद की सबसे अधिक मार मजदूरों पर पड़ती है। हमें योजनाबद्ध ढंग से इससे मुकाबला करना होगा।

सीपीएम के जिला सचिव अब्दुल अज़ीम खां ने फिलिस्तीन मे अपने मुक्ति और आजादी के लिए संघर्ष कर रहे मासूम बच्चों के जज्बे को सलाम किया। इंकलाबी मजदूर केंद्र से जुड़े रामजी सिंह ने कहा कि मुनाफा आधारित पूंजीवाद लोगों की बुनियादी जरूरत को ध्यान में रखकर उत्पादन करता है। केवल मुनाफे के लिए कुछ भी उत्पादन करना अराजक उत्पादन कहलाता है। पूंजीवाद का नया स्वरूप समाज के बड़े हिस्से को हताश, निराश, अवसादग्रस्त, खुदगर्ज और बेकार बना रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान दौर में पूंजीवाद श्रमिकों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा से वंचित कर रहा है। वर्तमान दौर में अधिकतम और न्यूनतम वेतन के बीच अंतर निरंतर बढ़ता जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा को नौकरी से नहीं नागरिकता से जोड़ा जाना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द मूर्ति ने कहा कि पूंजीवाद आधुनिक तकनीक का प्रयोग आम जनता का शोषण करने के लिए कर रहा है और हमको इसका पता भी नहीं चलता है। इस दौर में पूंजीवाद की चालाकियों के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों का उभार आज उम्मीद की किरण है। दुनिया को खूबसूरत बनाने का ख्वाब एक खूबसूरत दिमाग ही देख सकता है।

मार्क्सवादी चिंतक राम अवतार सिंह ने कहा कि आज एकाधिकारवाद की प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं।जनवादी शक्तियां पूंजीवादी चुनौतियों से निरंतर लड़ रही हैं। अजीम खां ने कहा कि दुनिया भर की जनवादी ताकतों की सोच आपस में मिलती-जुलती है। पूरी दुनिया में कायम इंसानी रिश्ते को तलाशने और तराशने की जरूरत है। डॉ संजय राय ने कहा कि नए दौर में उभरती नई चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए नए कार्यक्रमों की रूपरेखा जरूरी है।

 

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामाश्रय यादव ने कहा कि पूंजीवाद नई और नकली आवश्यकताओं को पैदा कर रहा है और हम अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को भूलते जा रहे हैं। नए दौर का पूंजीवाद सुनिश्चित वेतन पद्धति को तहस-नहस कर रहा है। कन्हैया प्रसाद ने कहा कि आधुनिक से आधुनिक तकनीक के पास वह संवेदनशीलता नहीं होगी जो मानव के पास होती है।

मुन्ना प्रसाद ने कहा कि आज पूंजीवाद विकसित होकर एकाधिकारवाद में बदल गया है। पूंजीवाद ने साम्राज्यवाद का चोला ओढ़कर विश्व भर में प्राकृतिक संसाधनों और बाजार पर कब्जा करने का घिनौना प्रयास किया है। प्रसेन ने कहा कि पूंजीवाद का असर और संगठित क्षेत्र के मजदूरों पर सबसे अधिक पड़ रहा है। पेशा आधारित संगठनों की आज बहुत आवश्यकता है। ब्रिकेश यादव ने कहा कि हमें नई चुनौतियों का सामना नए हथियारों से करना होगा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ तेजभान तथा धन्यवाद ज्ञापन बसंत कुमार ने किया। इस आयोजन में सुप्रीम कोर्ट की वकील सौम्या चतुर्वेदी, जंगशेर बहादुर राणा, रामभवन प्रसाद गुलाब, राम प्रवेश यादव, अंबरीश राय,पिंकी, आंचल, जान्हवी साधू यादव,सहित अनेक बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। अंत में आंचल और जान्हवी के जनवादी गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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