अवैध खनन पर रोक लगाने व मृतक मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए चुनार तहसील मुख्यालय धरना 16 सितंबर को धरना देगी
लखनऊ। मिर्जापुर के अहरौरा में प्रशासन की खनन माफियाओं से साठगांठ, अवैध खनन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण चार मजदूरों की जान चली गई।
यह निष्कर्ष है भाकपा (माले) के 17 सदस्यीय जांच दल का जिसने पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव के नेतृत्व में घटनास्थल का रविवार (6 सितंबर) को दौरा किया।
जांच दल में पार्टी की राज्य स्थायी समिति की सदस्य एवं मिर्जापुर जिला सचिव जीरा भारती, राज्य कमेटी सदस्य रामकृत बियार, खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के जिला सचिव भक्त प्रकाश श्रीवास्तव, इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के जिला अध्यक्ष सतीश यादव, ऐपवा की मंजू कोल, पार्टी नेता सुरेश बीयार, चिंता, रामकेश भारती, भोला कोल, प्रभु बियार, ओम प्रकाश पटेल, बबलू, रवि शंकर, राजनाथ आदि शामिल थे।
घटनास्थल से लौट कर सुधाकर यादव ने बताया कि अहरौरा बेशकीमती पहाड़ी क्षेत्र है। लेकिन वहां बड़े पैमाने पर लूट मची हुई है। यह लूट खनन माफियाओं को सत्ता संरक्षण के चलते है। ब्लास्टिंग में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है।

भगौती देई गांव स्थित ब्लास्टिंग एरिया के निकट क्रशर प्लांट में आवश्यक सुरक्षा उपायों और ब्लास्टिंग के दौरान मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही भी सामने आई है। शनिवार को दोपहर पत्थर तोड़ने के लिए की गई ब्लास्टिंग और प्लांट के भारी स्ट्रक्चर/मशीनरी हिस्से (डग) के अचानक भरभराकर गिर जाने से चारों मजदूर भारी मलबे के नीचे दब गए और मौत हो गई।
चारों मृत मजदूरों के नाम हैं : लाल बहादुर (35 वर्ष), अशोक (38 वर्ष), राकेश (28 वर्ष) और दुर्योधन (29 वर्ष)। ये सभी मूल रूप से सोनभद्र जिले के जुगैल थाना क्षेत्र के बड़गवां गांव के निवासी थे।
भाकपा (माले) जांच दल ने घटना की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, मृतक मजदूरों के परिवारों को तत्काल 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग की है।
जांच दल के सदस्यों ने कहा कि अवैध खनन पर रोक लगाने और मृतक मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी चुनार तहसील मुख्यालय पर 16 सितंबर को धरना देगी।
