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पेपर लीक,  बेरोजगारी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ़ जेन ज़ी महाजुटान यात्रा का इलाहाबाद में आगाज

इलाहाबाद। पेपर लीक,  बेरोजगारी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ़ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा ) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए)) ने  जेन ज़ी महाजुटान यात्रा का आगाज आज इलाहाबाद से किया। इलाहाबाद के पत्थर  गिरजाघर में आयोजित सभा को आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जेएनयू छात्र संघ की सह सचिव दानिश, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार, आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य के अलावा इलाहाबाद छात्र संघ के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के के रॉय ने संबोधित किया।

सभा में 25 जुलाई के आंदोलन में पुलिस द्वारा फर्जी मुकदमे लगाकर गिरफ्तार किए गए छात्र मोहम्मद वैश, मोहम्मद सूफ़ियान और संदीप कुमार को मंच पर बुलाकर उनकी पीड़ा सुनी गई और उनकी लड़ाई को न्याय दिलाने तक साथ लड़ने का संकल्प लिया गया।

इसके साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली आंदोलन के दौरान निष्कासित किए गए छात्र साथी रोशन ने भी मंच पर आकर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में प्रदेश में चल रहे प्राथमिक शिक्षक भर्ती आंदोलन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। आइसा ने नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती को पुरानी नियमावली के तहत लागू करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया और कहा कि इसे जेन ज़ी राइजिंग अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।

सभा में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा को सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया जा रहा है। हर कैंपस में छात्रसंघ चुनावों पर रोक, छात्र-छात्राओं का दमन और निष्कासन आम बात हो गई है। प्राथमिक शिक्षक भर्ती में सरकार नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। यह दिखाता है कि योगी सरकार विश्वविद्यालयों में लोकतंत्र से डरती है। जेन ज़ी  अब इस लूट और दमन के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी, इस लड़ाई को हम पूरे उत्तर प्रदेश में ले जाएंगे। अब उत्तर प्रदेश में बाबा का नहीं बाबा साहेब का राज, संविधान का राज चलेगा।

जेएनयू छात्र संघ की सहसचिव दानिश ने कहा कि जेएनयू से लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक दमन का तरीका एक ही है  सवाल उठाओ तो निलंबन, आंदोलन करो तो एफआईआर लेकिन छात्र डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम न अखलाक की 2015 की माबलिंचिंग भूले हैं, न हाथरस की बेटी को भूले हैं जिसे जिंदा जला दिया गया और न ही उन्नाव की उस बेटी को भूले हैं जिसे बलात्कारी भाजपा विधायक के खिलाफ आवाज उठाने की सजा पूरे परिवार को मिला।

आइसा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि जंतर-मंतर पर हमारी भूख हड़ताल एक शुरुआत थी। मुकदमे और जेल से आंदोलन नहीं दबेगा। प्राथमिक शिक्षक भर्ती की पुरानी नियमावली पर बहाल करने की मांग न्यायसंगत है और आइसा  इस लड़ाई में शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रयागराज से बनारस तक, हम इस लड़ाई को हर कैंपस में ले जाएंगे।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के के राय ने कहा कि 25 जुलाई को छात्र-छात्राओं पर लगाए गए फर्जी मुकदमें पूरी तरह असंवैधानिक हैं। हम कानूनी और सड़क दोनों लड़ाई में छात्रों के साथ हैं।

इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय आंदोलनों की धरती रही है। नौजवानों को जेल में डालकर यह सरकार अपनी नाकामी छुपा रही है, लेकिन यह आंदोलन रुकेगा नहीं।

कार्यक्रम में ईविवि छात्रसंघ के पूर्व उपमंत्री प्रेमशंकर, ऐक्टू के प्रदेश सचिव अनिल वर्मा, समकालीन जनमत के संपादक के.के. पांडेय, नागरिक समाज के संयोजक विनोद तिवारी, सुभाष पांडेय, राजवेंद्र सिंह, पद्मा सिंह, सीमा आजाद, रेखा मौर्य, कवयित्री रूपम मिश्र, राधा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन आइसा के प्रदेश सचिव शशांक ने किया।

जेन ज़ी महाजुटान यात्रा का अगला पड़ाव बनारस होगा।

सभा के बाद आइसा नेताओं नेहा, मनीष, दानिश, शशांक ने टीजीटी / पीजीटी और डीएलएड के सवालों पर धरनास्थल पर चल रहे आंदोलनों के मंच पर जाकर उनके संघर्षों का समर्थन किया और अनशनकारियों से बात की।

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