गोरखपुर। समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंवर प्रताप सिंह ने नया गोरखपुर बसाये जाने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 25 राजस्व गांवों की 6000 एकड़ जमीन का अनिवार्य अर्जन का विरोध करते हुए इसे किसानों के जमीन की लूट बताया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के सर्किल रेट के आधार पर सस्ते दर पर मुआवजा देते हुए जबरन जमीन ली जा रही है जिससे हजारों गरीब व छोटे जोत के किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उन्होंने अनिवार्य अर्जन को नियम विरुद्ध बताते हुए उसे निरस्त नहीं किये जाने पर 10 अक्टूबर के बाद से आंदोलन करने की घोषणा की है।
सपा नेता ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे का समर्थन करते हुए किसानों की लड़ाई का मजबूती से साथ देने की बात कही।
श्री सिंह ने नौ सितंबर को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में बताया कि शहर के सटे पूरब चौरी चौरा विधानसभा अन्तर्गत तहसील चौरी चौरा के 13 राजस्व ग्राम- आराजी बसडीला, आराजी मतौनी, बहरामपुर, भैंसहा, जगदीशपुर, जयपुर, कोनी, कुसम्ही कोठी, माड़ापार, मठिया बुजुर्ग, रूद्रापुर, सिसवा उर्फ चनकापुर व तकिया मेदनीपुर व शहर से सटे फर्टिलाइजर के उत्तर पिपराईच विधानसभा के अन्तर्गत तहसील सदर के 12 राजस्व ग्राम क्रमशः बैजनाथपुर, बालापार, देवीपुर, महराजगंज, नानीराम, परमेश्वरपुर, रहमतनगर, रामपुर, गोपालपुर, सोनबरसा, ठाकुरपुर नं0-1, ठाकुर नं० टोयम एवं विशुनपुर कुल 25 राजस्व ग्रामों में 6000 एकड़ जमीन प्रदेश सरकार गोरखपुर विकास प्राधिकरण के लिए अधिग्रहीत कर राही है। भूमि अधिग्रहण के लिए 2016 के सर्किल रेट का आधार बनाकर बाजार भाव से बहुत कम मुआवजा दिया जा रहा है। जिस जमीन की सात करोड़ रुपया एकड़ (7 से 10 लाख प्रति डिसमिल ) है उसे सिर्फ 70 लाख से एक करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा देकर अधिग्रहीत करने की कोशिश की जा रही है।
श्री सिंह ने इस सभी 25 गांवों में छोटे किसान हैं जिनकी जमीन अधिग्रहीत होने पर वे भूमिहीन हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि चौरी चौरा तहसील के तीन राजस्व ग्राम- माड़ापार, तकिया मेदनीपुर, कोनी में जमीन अधिग्रहण करने की कार्यवाही के तहत जिलाधिकारी, गोरखपुर द्वारा 19 सितंबर 2024 को धारा-4 का प्रकाशन समाचार पत्रों के माध्यम से किंया। इसके विरोध में उन्होंने माड़ापार, तकिया मेदनीपुर में किसान पंचायत एवं जनसभा की और 7 अक्तूबर 2024 को सैकड़ों किसानों के साथ जिलाधिकारी को अधिग्रहण के विरूद्ध ज्ञापन दिया।
जिलाधिकारी द्वारा 30 दिसम्बर 2024 को घोषित जनसुनवाई में उन्होंने और किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया। इसके बाद 21 अप्रैल 2025 को गोरखपुर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो० संदीप कुमार की अध्यक्षता में कमेटी की तीन बैठक हुई, जिसमें ग्राम प्रधानों के न आने से बैठक निरस्त करनी पड़ी।
श्री सिंह ने कहा कि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के नियमों के तहत जिलाधिकारी गोरखपुर द्वारा धारा-4 का प्रकाश नियम विरूद्ध है। जिलाधिकारी द्वारा बिना अधिकार के धारा-4 का प्रकाशन समस्त समाचार पत्रों में तथा जन सुनवाई एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय में की गई बैठक जिलाधिकारी द्वारा अनाधिकृत कार्यवाही कर सरकारी धन का दुरूपयोग किया गया। उनके द्वारा विरोध किये जाने पर 4 जुलाई 2025 को प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग पी० गुरूप्रसाद द्वारा तहसील चौरी चौरा के राजस्व ग्रामों माड़ापार, तकिया मेदनीपुर, कोनी का धारा-4 का पुनः प्रकाशन किया गया।
उन्होंने कहा कि किसानों के विरोध के बावजूद 27 अक्तूबर 2025 को मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में गोरखपुर विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में जमीन अधिग्रहण के लिए जबरन अनिवार्य अर्जन का प्रस्ताव पास कर दिया गया। यही नहीं जमीन अधिग्रहण के लिए वर्ष 2016 के सर्किल रेट लागू किया जा रहा है जबकि बाजार भाव के अनुरूप नया सर्किल रेट करने की मांग की गई थी।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री सिंह ने कहा कि नियमानुसार जिन ग्रामों के 80 प्रतिशत किसान सहमति नहीं देते हैं तो जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता। फेयर कम्पन्सेसन एक्ट के तहत बाजार भाव के अनुसार किसानों की जमीन अधिग्रहण किया जाना चाहिए लेकिन सारे नियम कानून की अनदेखी करते हुए अनिवार्य अर्जन का प्रस्ताव किसानों के पीठ में छूरा घोपने जैसा है।
सपा नेता ने कहा कि किसानों के साथ हो रहे अन्याय के बारे में उन्होंने 6 अगस्त को 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जानकारी दी तो उन्होंने उन्होनें किसानों के संघर्ष में पूरा साथ देने का भरोसा दिया।
श्री सिंह ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गोरखपुर बसाने बसाने का प्रस्ताव निरस्त नहीं किया और जिलाधिकारी द्वारा बिना अधिकार के नियम विरूद्ध धारा-4 का प्रकाशन कर सरकारी धन की लूट पर उनके खिलाफ़ कार्यवाही नहीं की गई तो 10 अक्टूबर के बाद समाजवादी पार्टी बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी।
