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परवेज परवाज को रेप के आरोप में आजीवन सश्रम कारवास की सजा

परवेज परवाज (फाइल फोटो)

सीएम के खिलाफ हेट स्पीच का मामला अदालत में ले गए थे परवेज परवाज 

गोरखपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोविंद बल्लभ शर्मा ने एक्टिविस्ट परवेज परवाज और महमूद उर्फ जुम्मन बाबा को दुष्कर्म के आरोप में आज आजीवन सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों आरोपी पिछले दो वर्ष से जेल में बंद हैं। परवेज परवाज ने वर्ष 2007 में सीएम योगी आदित्यनाथ पर हेट स्पीच देने और उसके कारण गोरखपुर व आस-पास के जिलों में बड़े पैमाने पर हिंसा होने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह मामला आज भी सुप्रीम कोर्ट में है।

दो वर्ष पहले चार जून 2018 को एक महिला ने राजघाट थाने में परवेज परवाज और महमूद उर्फ जुम्मन बाबा  के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया था। इस केस की पूर्व में हुई विवेचना में केस फर्जी पाया गया था और अंतिम रिपोर्ट अदालत को भेज दी गई थी लेकिन अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर इसकी फिर से विवेचना करायी गई जिसमें उन पर आरोप के पर्याप्त सूबत मिलने का दावा करते हुए पुलिस ने 25 सितम्बर 2018 को परवेज परवाज को गिरफ्तार कर लिया था।

सीएम योगी के हेट स्पीच मामले में न्यायिक लड़ाई लड़ रहे परवेज़ परवाज़ गैंग रेप केस में गिरफ्तार

 

अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता यशपाल सिंह का कहना था कि वादिनि ने थाना राजघाट में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने तहरीर में लिखा था कि ‘वह अपने पति से अलग रहती है। वह झाड़-फूंक के लिए मगहर मजार जाती थी जहां उसे महमूद उर्फ जुम्मन बाबा मिले। उन्होंने कई दरगाहों पर झाड़ फूंक की जिससे मुझे राहत मिली। तीन जून 2018 को उन्होंने रात 10.30 बजे पांडेयहाता के पास दुआ करने के बहाने बुलाया और एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहां उन्होंने और उनके साथ मौजूद एक शख्स ने बलात्कार किया। उस शख्स को जुम्मन, परवेज भाई बोल रहे थे। घटना के बाद हमने मोबाइल से 100 नंबर पर फोन किया, तब पुलिस आई और हमें साथ ले गई।’

आज सुबह इस ममले की सुनवाई में जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोविंद बल्लभ शर्मा ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। दोपहर दो बजे उन्होंने सजा सुनाई। दोनों अभियुक्तों को आजीवन सश्रम कारावास और 25-25 हजार के अर्थदंड की सजा सुनायी, अर्थदंड  न देने की स्थिति में एक-एक वर्ष की अतिरिक्त आजीवन सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड में से 40 हजार रुपये पीडिता के पुनर्वास के लिए दिया जाएगा।

परवेज परवाज के अधिववक्ता ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

परवेज परवाज और अधिवक्ता असद हयात ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (घटना के समय गोरखपुर के सांसद) पर 27 जनवरी 2007 को गोरखपुर रेलवे स्टेशन गेट के सामने हेट स्पीच देने और उसके कारण गोरखपुर व आस-पास के जिलों में बड़े पैमाने पर हिंसा होने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में अदालत से हेट स्पीच और उसके कारण हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। बाद में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रमुख सचिव (गृह) ने मई, 2017 में योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुकदमे से इनकार के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी। इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट में गया।

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