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‘ देहात ’ संस्था का कृषि आधारित आजीविका का बहराइच माडल ‘ दि विजन आफ अंत्योदया ’ में शामिल

लखनऊ/ बहराइच. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में विगत 20 सालों से काम कर रही स्वैच्छिक संस्था ‘ देहात ‘ के बहराइच जिले के मिहींपुरवा विकास खंड के वनवासियों व आदिवासी किसानों के साथ ‘ कृषि आधारित आजीविका ‘ के अभिनव प्रयोग को राष्ट्रीय स्तर पर देश भर के चुनिंदा सफल माडलों में शामिल किया गया है.

कृषि, आजीविका, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश भर में स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा जमीनी स्तर पर किए गये सफलतम प्रयोगों को ‘ दि विजन आप अंत्योदया ‘ नामक संकलन में दस्तावेजित व प्रकाशित किया गया है.

इस संकलन का विमोचन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा आज  उपराष्ट्रपति निवास स्थित सरदार पटेल सभागार में किया गया.

 बहराइच के मिहींपुरवा विकास खंड के सघन वन क्षेत्र कतर्नियाघाट के बीच बसे 38 गांवों के लोगों की आजीविका तब संकट में आ गयी जब वन एवं वन्य जीव संरक्षण के कानूनों के चलते इस क्षेत्र में आजीविका के समस्त संस्थागत स्रोत बंद हो गये जिनमें मुख्यत: वन निगम के दो प्रकाष्ठ डिपो, सिंचाई विभाग की योजनाएं, कोठिया घाट में गेरूआ नदी से पत्थरों की निकासी, पत्थर तोड़ने के क्रैशर और सेंट्रल स्टेट फार्म आदि प्रमुख हैं.

डेवलपमेंटल एसोशिएशन फार ह्यूमन एडवांसमेंट ( देहात ) के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी डा. जितेन्द्र चतुर्वेदी ने अपनी संस्था के जरिए 1000 छोटे किसान परिवारों के साथ कृषि आधारित आजीविका एवं पोषण युक्त भरपेट भोजन के उद्देश्य से फसल व सुजलाम सुफलाम के नाम से परियोजनाएं शुरू की. इसमें बहुस्तरीय खेती, मिश्रित खेती, ट्रेंच फार्मिंग, वर्मी कम्पोस्ट , अरासायनिक कीटनाशक आदि तरीकों के जरिए लागत को कम करते हुए आय में वृद्धि की गई. फलस्वरूप प्रति एकड़ प्रति वर्ष आय 50,000 रू0 से एक लाख रुपए तक बढ़ी और यह प्रयोग 1700 अन्य किसानों ने भी अपना कर अपना जीवन स्तर सुधारा.

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