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 बीआरडी मेडिकल कालेज के पोषण पुनर्वास केंद्र में पाँच महीने में 63 बच्चे कुपोषण से मुक्त हुए 

गोरखपुर। बाबा राघव दास मेडिकल कालेज स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में अप्रैल से लेकर अगस्त तक 69 अति कुपोषित बच्चे आए  जिसमें 63 बच्चे स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कर केवल इलाज किया जाता है। बच्चों को पौष्टिक भोजन के साथ-साथ अभिभावकों को श्रम ह्रास की राशि भी दी जाती है। केंद्र पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के माध्यम से बच्चे भेजे जाते हैं।

बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष और पोषण पुनर्वास केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. अनिता मेहता ने बताया कि अप्रैल से लेकर अगस्त तक कुल 69 अति कुपोषित बच्चे आए, जिन्हें कोरोना से सुरक्षा प्रदान करते हुए स्वास्थ्य लाभ दिया गया। कुल 63 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हो चुके हैं।

डॉ. अनिता ने बताया कि कालेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार के दिशा-निर्देशन में कोरोना काल के दौरान भी केंद्र का संचालन बेहतर तरीके से किया जा रहा है। केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत जायसवाल, डायटिशियन पद्मिनी और सहयोगी टीम एक-एक बच्चे के स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखती हैं। बच्चे के साथ एक अभिभावक को भी रहने की अनुमति है और उन्हें भी भोजन दिया जाता है। जो अभिभावक केंद्र पर समय देते हैं उन्हें प्रतिदिन 100 रुपये की दर से श्रम ह्रास की राशि उनके खाते में दी जाती है। उन्होंने आम जनमानस से अपील की है कि अगर बच्चा अति कुपोषित है तो चिकित्सक को दिखाएं और उनके परामर्श से केंद्र में भर्ती कराएं। केंद्र पर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए, मॉस्क, ग्लब्स के साथ बच्चों को सेवा दी जा रही है।

16 दिन में ठीक हो गया आयुष

देवरिया जिले के अमरेश और मंडिला का पुत्र आयुष (4.9 वर्ष) कोरोना के लक्षणों के साथ मई माह में कालेज के बाल रोग विभाग में आया था। जांच कराई गई तो कोरोना निगेटिव आया। आयुष अति कुपोषित था और उसका वजन 9.300 ग्राम था। 18 मई को उसे एनआरसी में भर्ती कराया गया। केंद्र की डायटिशियन पद्मिनी ने बताया कि इलाज के साथ खानपान का खासतौर से ख्याल रखा गया। नोडल अधिकारी खुद आयुष का विशेष तौर पर ध्यान रखती थीं। महज 16 दिनों बाद 2 जून को डिस्चार्ज होते समय आयुष का वजन 11.150 हो गया। बच्चे के अभिभावकों को समझाया गया है कि वह फॉलो अप के लिए आयुष को केंद्र पर लाते रहें।

केंद्र की सुविधाएं

• बच्चे की मां या एक अभिभावक को निशुल्क पौष्टिक आहार
• बच्चे को दवा, दूध, खाना-पीना सब निशुल्क
• बच्चे की हर तरह की चिकित्सकीय जांच व दवा की निशुल्क सुविधा
• बाल रोग विशेषज्ञ बच्चे की नियमित जांच करते हैं
• घर ले जाने से पहले बच्चे के खानपान से संबंधित काउंसिलिंग
• जितने दिन बच्चा भर्ती रहता है उतने दिन का 100 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से बच्चों के अभिभावक के खाते में पैसे
• ठीक हुए बच्चों को फालो अप के लिए लाने पर 100 रूपये किराया और 40 रूपये खानपान का मिलता है।

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