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महराजगंज के एसीएमओ का इस्तीफा, अनुचित दबाव बनाने और केस दर्ज कराने की धमकी देने का आरोप लगाया

महराजगंज। महराजगंज के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ ) डा. विवेक प्रकाश श्रीवास्तव ने अच्छा कार्य करने के बावजूद अनुचित प्रशासनिक दबाव बनाए जाने, इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौत होने पर चिकित्सकों को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए एफआईआर कराने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने एक पखवारे पहले अपना इस्तीफा प्रदेश के महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को भेजा था। दो दिन पूर्व उन्होंने फिर पत्र लिखकर इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया है। डा. विवेक ने अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, गोरखपुर मंडल को भी इस्तीफे की सूचना देते हुए व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा है। उन्होंने इस्तीफे में जिला प्रशासन के कार्यों की खामियों को उजागर किया है और कहा है कि इसके चलते हो रही बीमारियों की जिम्मेदारी चिकित्सकों व चिकित्साधिकारियों पर थोपी जा रही है।

डा. विवेक प्रकाश श्रीवास्तव महराजगंज के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी वेक्टर बार्न डिजीज हैं। इसके अलावा उनके उपर जिला क्षय रोग अधिकारी व इंफेक्शन प्रिवेंशन कमेटी का भी पदभार है। वह पिछले तीन वर्षों से महराजगंज में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

उन्होंने 15 जुलाई को प्रदेश के महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे की एक काॅपी सीएएमओ को भी दी है। गोरखपुर न्यूज लाइन से बात करते हुए उन्होंने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है।

 

डा. विवेक श्रीवास्तव ने अपने इस्तीफे का कारण फील्ड में काम करने न देना, अत्यधिक समीक्षा बैठक लिया जाना, समीक्षा बैठकों में दबाव बनाना, एफआईआर कराने की धमकी देना, शुद्ध पेयजल, गंदगी, शौचालयों के अभाव के कारण संक्रमाक बीमारियों के फैलने की जिम्मेदारी चिकित्सकों व चिकित्साधिकारियों पर थोपना बताया है।

अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा है कि फील्ड में कार्य करने का समय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है। विगत आठ कार्य दिवस में तीन बार समीक्षा बैठक बुलाए जाने से मैं आहत हुआ हूं। अल्प अंतराल में बार-बार मीटिंग बुलाए जाने से पद का मूल एवं वास्तविक कार्य नहीं कर पा रहा हूँ। बैठकों में स्वास्थ्य से सम्बन्धित वैज्ञानिक तथ्यों को अनेक बार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संज्ञान नहीं लिया जा रहा है ( यथा बच्चों की पोषण की दयनीय स्थिति, पेयजल की अशुद्धता की स्थिति आदि)।

डॉ विवेक ने पत्र में लिखा है कि स्वास्थ्य अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। बच्चों की मौत के लिए चिकित्सकों को सीधे जिम्मेदार मानते हुए एफआईआर दर्ज करके पुलिसिया उत्पीड़न की धमकी दी जा रही है।

उन्होंने इस्तीफे में लिखा है कि वर्ष 2019 में जल विभाग द्वारा की गयी जीवाणु परीक्षण की रिपोर्ट में 35 फीसदी से अधिक हैण्ड पम्प जीवाणु से संक्रमित पाए गए थो। वर्ष 2020 में जितने भी एईएस/जेई के केस पाए गए थे उसमें अधिकतर अति कुपोषित कुपोषित व अंडरवेट हैं। महराजगंज जिले में 25771 कुपोषित, 4017 अति कुपोषित, 70 सीवयिरली एक्यूट मालनरिश्डख् 1508 एक्यूट माॅलनरिश्ड बच्चों का भार है। ऐसे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता टीकाकरण के बाद भी विकसित नहीं हो पाती है। अति कुपोषित बच्चों की मृत्यु दर सामान्य बच्चों की तुलना में कई गुना अधिक होती है।

उन्होंने लिखा है कि मुख्य सचिव द्वारा सात जुलाई 2020 को निर्देशित किया गया था कि समूह ग व घ के कार्मिकों को रोस्टर के अनुसार अपने घर से कार्य करने की अनुमति दी जाए जिस कारण से विभाग में लिपिकीय कार्यालयी कार्य करना अत्यंत कठिन हो गया है। ऐसे में आठ कार्य दिवस के भीतर तीसरी समीक्षा बैठक रखना औचित्यपूर्ण प्रतीत नहीं होता है।

 

डा. विवेक श्रीवास्तव ने 30 जुलाई को महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि उन्होंने 15 जुलाई को त्याग पत्र स्वीकार करने का प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन त्यागपत्र स्वीकार किए जाने के बारे में अभी तक काई सूचना नहीं मिली है। राष्टीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम एवं संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने के बावजूद निरन्तर अनुचित प्रशासननिक दबाव के कारण मै आज पुनः आपसे निवेदन करता हूं कि मेरे त्याग पत्र पर सहानुभूति पूर्ववक विचार करते हुए इसे स्वीकार करें।

 

 

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