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कुशीनगर जिले में धान की रोपनी 80 फीसदी पूरी हुई

कुशीनगर. कुशीनगर जिले में 12563 हेक्टेयर में धान की रोपाई होती है. अब तक 80% से ज्यादा रोपनी हो चुकी है. अभी 20% रोपाई ही बाकी है. ये स्थान हैं जहां पानी की सुविधा नहीं है.

यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी प्यारेलाल ने दी. उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने रोहिणी नक्षत्र के पहले या दूसरे दिन भी बीज डाल दिया था, उनका यदि बाढ़ से धान की खेती का नुकसान नहीं हुआ तो किसानों का घर धान से भर जाएगा.

जिले में सिंचाई के साधन निजी बोरिंग के अलावा सरकारी नलकूप तथा 1520 किलोमीटर लंबी नहर है.  जहां सिंचाई की सुविधा है वहां पर किसानों ने लगभग 80% धान की रोपाई कर ली है. रोपनी करने में हाटा , कसया, पडरौना तहसील के लोग आगे हैं. शेष तहसील के लोग जिनके पास सिंचाई के संसाधन नहीं है उन किसानों की धान की रोपनी अभी करनी बाकी है.

श्री प्यारेलाल ने बताया कि आद्रा नक्षत्र में धान की रोपाई करने से धान की फसल में किसी तरह का रोग और कीट का प्रकोप नहीं होता है. इस नक्षत्र में रुक-रुक कर हो रही बरसात से धान की फसल को पानी खाद की तरह काम करती है.

छितौनी क्षेत्र के किसान इंद्रजीत कुशवाहा ने बताया कि प्रकृति के इस रूप से किसान बहुत खुश हैं. आगे यह स्थिति यही बनी रही तो बाढ़ का का खतरा हो सकता है.

सरगटिया कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अशोक राय का कहना है कि धान की खासियत है कि अगर एक सप्ताह तक पानी में डूबा रहा और केवल उसका ऊपरी भाग पानी से बाहर हो तो बाढ उतरने के बाद भी फसल ठीक होती है।

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