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हमें पूरी धरती की चिंता करनी होगी, तभी हम मनुष्य को बचा सकेंगे : ध्रुव देव मिश्र ‘  पाषाण ’ 

जन कवि पाषाण के 82 वें जन्मदिन  पर पतहर-पत्रिका का लोकार्पण

देवरिया। वरिष्ठ कवि और रचनाकार ध्रुव देव मिश्र पाषाण का 82 वां जन्मदिन बुधवार को उनके आवास पर पतहर-पत्रिका, नागरी प्रचारिणी सभा सहित शहर के साहित्यकारों के बीच मनाया गया। इस अवसर पर पत्रिका के नवीन अंक जो पाषाण जी पर प्रकाशित है, का लोकार्पण भी किया गया। पतहर-पत्रिका द्वारा अंगवस्त्र व पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

अपने जन्म दिन पर पतहर पत्रिका के नवीन अंक के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए पाषाण जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति को आज गंभीरता से समझने की जरूरत है। विश्व गुरु की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है।दुनिया का हर श्रेष्ठ व्यक्तित्व ने हर क्षेत्र में मनुष्य और मनुष्यता की रक्षा के लिए बड़ा काम किया है। हमें पूरी धरती की चिंता करनी होगी। पूरे विश्व के लोगों के बारे में सोचना होगा। तभी हम मनुष्य को बचा सकेंगे, राम और कृष्ण जैसे महानायक हैं, जो सौंदर्य के मानदंड को ही बदल देते हैं। उनके जीवन और चरित्र में कर्मठता है।
उन्होंने कहा कि सत्ता व्यवस्था की शोभायात्रा में कविता की समझदारी आज के सांस्कृतिक परिदृश्य के भयानकतम दुर्घटना है।

कविता की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज का युग रक्त के राग की कविताओं का है। इन कविताओं की धारा किसी भी अर्थ में सीमित नहीं होती। वस्तु और रूप की नई संभावनाएं इनमें हरदम बनी रहती हैं। पतहर पत्रिका की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बहुप्रतीक्षित अंक ऐसे अवसर पर आया है, जब मैं 82 वर्ष का हो चुका हूं। अपने जनपद में किसी पत्रिका के द्वारा और वहां के साहित्यिक समूह के द्वारा सम्मानित होने का अवसर मिलना बहुत सौभाग्य की बात है। आज के समय में जब नौजवान रोजगार के लिए भाग रहे हैं, ऐसे में कुछ युवा साहित्य के मोर्चे पर लगातार सक्रिय हैं। यह हिंदी साहित्य के लिए शुभ है।

कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए एसएसबीएल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय मणि त्रिपाठी ने कहा कि इस तकनीक के युग में हमें अपनी गंभीरता को बचाएं रखना होगा। निडर हो जाना यानी पाषाण हो जाना, पूरी ईमानदारी से साहित्य के लिए हो जाना यानी पाषाण हो जाना है। उन्होंने कहा कि कोई भी धारा पाषाण को रोक नहीं पाई। पाषाण धारा से इतर रहे। हम भाग्यशाली हैं कि संस्कृति और संस्कार की उद्गम स्थली पर पाषाण का जन्म हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार जयनाथ मणि त्रिपाठी ने कहा कि पाषाण जी का 82 वां जन्मदिन हम सभी को आह्लादित करने वाला है। वे संघर्ष के कवि हैं। इनकी कविताएं आमजन की कविताएं है।पतहर-पत्रिका ने इन पर अंक निकाल कर के पूर्वांचल में उपेक्षित पाषाण जी को जिंदा कर दिया है।

पतहर पत्रिका के डॉ चतुरानन ओझा ने कहा कि पाषाण की कविताओं में चुनौती दिखाई देती है। इनकी कविताएं वर्तमान को दर्शाती हैं। आज रोमांचक दिन है। आज कई साहित्यकारों का जन्मदिन है।

कवि सरोज पांडे ने कहा कि निर्भीकता कविता के लिए आवश्यक है। जिसमें संकल्प होगा वही कविता कर सकेगा। पाषाण संकल्पी पुरुष है। पत्रकार महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि पाषाण की रचनाओं में लोग जीवन दिखलाई पड़ता है। हमें उनकी रचनाओं से सीखना होगा।

संपादक विभूति नारायण ओझा ने कहा कि पतहर-पत्रिका के इस अंक में पाषाण जी पर देश के विभिन्न हिस्सों से रचनाकारों की हिस्सेदारी है।साथ में पाषाण जी की रचनाएं व कविताएं भी प्रकाशित है।

जन्मदिन के अवसर पर आयोजित पतहर पत्रिका के लोकार्पण के कार्यक्रम में पाषाण जी की पत्नी शांति देवी, उद्भव मिश्र, रविन्द्र नाथ त्रिपाठी, वाचस्पति मिश्र, सर्वेश्वर ओझा, रामकिशोर वर्मा,चक्रपाणि ओझा, बृजेन्द्र मिश्र, सौम्या मिश्र, श्रेया, अमित मिश्रा, कल्पना मिश्रा, अमृतांशु,अनीता, सहित अनेक गणमान्य साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नागरी प्रचारिणी सभा के मंत्री इंद्र कुमार दीक्षित ने किया।आभार संपादक विभूति नारायण ओझा ने किया।

 

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