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केंद्र सरकार ने दो साल बाद जारी किया मदरसा शिक्षकों का 6 माह का बकाया मानदेय

मदरसों में आधुनिक शिक्षा देने वाले शिक्षकों का हाल

गोरखपुर, 17 जनवरी। मदरसों में हिन्दी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों का मानदेय के अभाव में बुरा हाल है। सालों पुराना बकाया मानदेय पाने के लिए सालों साल लग जा रहे हैं। पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने जिले के 29 मदरसों का दो साल बाद 6 माह का बकाया मानदेय जारी किया।

सरकार ने 11 जनवरी को लाट सं. 672 व 1506 वाले मदरसों के आधुनिकीकरण शिक्षकों का वर्ष 2015-16 का मानदेय ही जारी किया है। यह केंद्र सरकार का केंद्रांश है। इसके तहत स्नातक शिक्षक को 6000 रुपया व परास्नातक शिक्षक को 12000 रुपया मानदेय प्रतिमाह की दर से मानदेय मिलेगा। इस बजट से जिले के लगभग 29 मदरसों के लगभग 87 शिक्षकों का 6 माह का बकाया मानदेय ही मिलना है। लाट सं. 672 के तहत जिले के लगभग 08 व लाट सं. 1506 के तहत जिले के लगभग 21 मदरसे शामिल हैं। जिले के 168 मदरसे ‘मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ से आच्छादित है जिसमें 504 शिक्षक कार्यरत हैं। इन मदरसों को कई लाटों में विभाजित किया गया है। इन शिक्षकों का कहीं दो तो कहीं तीन व चार वर्ष का मानदेय सरकार ने रोका हुआ है। मानदेय आने के बाद भी समय से मानदेय मिलना भी दूर की कौड़ी है। मानदेय तभी मिलेगा जब सारी औपचारिकताएं पूरी होंगी। अभी मदरसों की जांच प्रक्रिया चल रही है। इस वजह से मानदेय मिलने में काफी वक्त लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

अगस्त 2017 में लाट सं. 1446 के मदरसा शिक्षकों के डेढ़ माह (वर्ष 2015-16 का मानदेय) के भुगतान में पांच से छह माह लग गए। अभी तक केंद्र सरकार ठीक ढ़ंग से इन शिक्षकों का सालों पुराना बकाया मानदेय ही नहीं दे पायी है और कब तक दे पायेगी कुछ नही कहा जा सकता। यहां ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा सिर्फ जुमला ही नजर आ रहा है। इन शिक्षकों को अपनी मेहनत का मानदेय पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की यह योजना बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

केंद्र पुरोनिधानित मदरसा/मकतब आधुनिकीकरण योजनान्तर्गत के तहत काम करने वाले मदरसा शिक्षकों में आक्रोश है। शिक्षकों का कहना हैं कि बकाया मानदेय देने में सरकार क्यों आनाकानी कर रही है, समझ से परे है। केंद्र व प्रदेश सरकार के कहने और करने में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा हैं। दोनों सरकारें मदरसों में आधुनिकीकरण शिक्षा को बढ़ावा देने की बात तो करती हैं लेकिन मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मानदेय देने में हद दर्जे की आनाकानी कर रही हैं। जब से योजना शुरू हुई और अभी तक सरकार माहवार मानदेय देने में असमर्थ नजर आयी हैं।
प्रदेश सरकार ने नवम्बर 2017 तक का राज्यांश जिले के सभी शिक्षकों के लिए जारी कर दिया है। खाते में राज्यांश पहुंचना शुरू भी हो गया है। राज्य सरकार स्नातक शिक्षक को 2000 रूपया व परास्नातक शिक्षक को  3000 रूपया प्रतिमाह राज्यांश के तौर पर देती है। वहीं राज्य सरकार भी राज्यांश नियमित रूप से नहीं दे पा रही है। यह योजना वर्ष 1994  चल रही है।  वर्ष 2008 के बाद से मानदेय नहीं बढ़ा है। जबकि 2008 के बाद महंगाई कई गुना बढ़ी है।
अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक बदरे आलम अंसारी ने कहा कि लाट सं. 672 व 1506 वाले मदरसों का तीसरे साल में छह माह (वर्ष 2015-16) का मानदेय आया है। जहां तक आधुनिकीकरण योजना में पुस्तकालय की स्थापना, कम्पयूटर प्रयोगशाला, साइंस मैट किट, शिक्षकों की ट्रेनिंग पर खर्च होने वाला बजट तभी मिलता है जब मदरसा आच्छादित होता है। उक्त मद में पैसा पहले ही आ चुका है। आये हुए बजट से मीडिया भ्रमित हुआ है। इस बजट में लाट सं. 672 व 1506 वाले मदरसों के शिक्षकों का केवल दो साल पुराना छह माह का बकाया मानदेय ही केंद्र सरकार ने भेजा है। सरकार द्वारा मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मानदेय समय पर देने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस ओर कभी भी न तो यूपीए सरकार ने ध्यान दिया और न ही प्रदेश की सपा और बसपा सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। यह शिक्षक इस समय घोर निराशा में हैं।

श्री अंसारी ने कहा कि पिछले हफ्ते लखनऊ में केंद्र सरकार से वार्ता में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने आश्वस्त किया है कि 15 दिन के अंदर सभी शिक्षकों का बकाया मानदेय जारी कर दिया जायगा। साथ ही उन्होंने कहा की केंद्र सरकार ने इन शिक्षकों के मानदेय बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भी दिया है।

अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के जिला महासचिव मोहम्मद आजम ने कहा कि इस योजना का भविष्य उज्जवल नजर नहीं आ रहा हैं। पिछली व वर्तमान सरकारों द्वारा इन शिक्षकों पर ध्यान नहीं दिया गया जिस वजह से यह शिक्षक दूसरे के उधार पर जिंदा है। भूखमरी के हालात हो गए है। सालों का मानदेय अभी तक बकाया हैं। मानदेय साल गुजरने के बाद ही मिलता हैं। हमारी मांगे हैं कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को स्थायी करने के साथ ही केंद्र सरकार के बराबर उप्र सरकार द्वारा अंशदान दिया जायें। केंद्र सरकार से लम्बित सम्पूर्ण बकाया मानदेय जल्द दिया जाए। प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। महंगाई को देखते हुए मानदेय (केंद्रांश व राज्यांश) बढ़ाया जाए।

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