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विचार

हिंसा में कोई मर्दानगी नहीं

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नासिरुद्दीन वरिष्ठ पत्रकार रघुवीर सहाय की कविता ‘औरत की जिंदगी’ की कुछ पंक्तियां हैं- कई कोठरियां थीं कतार में/ उनमें किसी में एक औरत ले जाई गयी/ थोड़ी देर बाद उसका रोना सुनाई दिया/ उसी रोने से हमें जाननी थी एक पूरी कथा/ उसके बचपन से जवानी तक की कथा… तीन लाख 27 हजार 394- महज गिनने के लिए यह ...

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‘ जे नोटवा बंद कइले बा उहो चटनी ओटनी खात बा का ’

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  रमाशंकर चौधरी किसुन कुशवाहा उर्फ महतो खड्डा विधान सभा क्षेत्र से भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे एक नेता के प्रबल समर्थक हैं लेकिन उससे ज्यादे मोदी भक्त हैं। खेतिहर मजदूर किसुन की आदत में शुमार है कि वह सुबह चाय पीने चौराहे पर जाते हैं और सभी हिन्दी अखबार जरुर पढते है। अखबारों से मिली सूचनाओं से ...

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पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ अनवरत संघर्ष का अप्रितम योद्धा

फिदेल कास्त्रो

पूंजीवाद, और साम्राज्यवाद के खिलाफ अनवरत संघर्ष का अप्रितम योद्धा सग़ीर ए खाकसार, वरिष्ठ पत्रकार  वो शख्स अमेरिका की उधार दी हुई सांसों पर जीना नहीं चाहता था।उसे किसी के बनाये और थोपे गए वसूल पसन्द नहीं थे। आजीवन अमेरिकी नेतृत्व को चुनौती देना , प्रतिबंध झेलना बर्दाश्त था लेकिन विश्व चौधरी के सामने सर झुकाना कत्तई मंज़ूर नहीं था। ...

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तीन तलाक,समान नागरिक संहिता और मोदी सरकार

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जावेद अनीस समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) स्वतंत्र भारत के कुछ सबसे विवादित मुद्दों में से एक रहा है. वर्तमान में केंद्र की सत्ता पर काबिज पार्टी और उसके पितृ संगठन द्वारा इस मुद्दे को लम्बे समय से उठाया जाता रहा है . यूनिफार्म सिविल कोड को लागू कराना उनके हिन्दुतत्व के एजेंडे का एक प्रमुख हिस्सा है. इसीलिए ...

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‘ मानसिक आपातकाल ’ में जिंदगी

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नासिरुद्दीन वरिष्ठ पत्रकार हमने ध्यान दिया होगा. हमारे साथ जब अचानक कुछ होता है, तो दिमाग अलर्ट कर देता है. जैसे- कोई मारने के लिए हाथ उठाता है, तो हम झटके से बचने की कोशिश करते हैं या उसका हाथ पकड़ लेते हैं. कोई हिंसक जानवर हमारी ओर दौड़ता है, तो अपने आप बचने के लिए मुस्तैद हो जाते हैं. ...

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नोटबंदी : कौन हैं जो चैन से हैं ?

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नासिरूद्दीन: देश भर में ऐसी बेचैनी, अफरातफरी, परेशान हाल लोग ज़माने बाद एक साथ सड़कों पर दिख रहे हैं। ये किसी पार्टी के ‘बहकावे’ या ‘बुलावे’ पर घरों से नहीं निकले हैं। ये आंदोलन नहीं कर रहे हैं, वे अपनी मेहनत की कमाई को सहेजने के लिए निकले हैं। अपनी ही पूंजी को लेने भोर से शाम तक डटे हैं ताकि ...

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तीस साल पहले और अब !

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नासिरुद्दीन (वरिष्ठ पत्रकार) एक दानिश्वर की मशहूर लाइन है- जो इतिहास भूल जाते हैं, वे इसे दोहराने की गलती करते हैं. इतिहास में तीस साल, लंबा वक्त नहीं होता है. फिर भी लगता है कि हम बहुत जल्दी भूलने के आदी हो गये हैं. नतीजतन, बुरे वक्त को दोहराने की गलती करते रहते हैं. फिर वैसा ही माहौल बनाने की ...

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बीसीसीआई के गले में सुप्रीम कोर्ट की घंटी

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जावेद अनीस भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को सही ठहराने के कोर्ट के फैसले को लेकर जो पुनर्विचार याचिका दायर की थी उसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा ठुकरा दिया गया है. अदालत ने सिफारिशों को लागू करने में टाल-मटोल को लेकर भी बीसीसीआई को फटकार लगाई है. कोर्ट का यह रुख बीसीसीआई के लिए बड़ा झटका है और ...

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बार्डर पर बाजार

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मेरा गांव मेरा देश -1 मनोज कुमार सिंह 6 अक्तूबर को सिद्धार्थनगर जाने का मौका मिला। सिद्धार्थनगर प्रेस क्लब के नव निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करना था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार एवं कपिलवस्तु पोस्ट के सम्पादक नजीर मलिक के साथ कपिलवस्तु चल पड़े। सिद्धार्थनगर कई बार आना हुआ लेकिन जिले का यही कोना ...

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नये मिजाज का शहर

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स्वदेश कुमार सिन्हा कोई हाथ भी न मिलायेगा , जो गले मिलोगे तपाक से ये नये मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो। बशीर बद्र एक मित्र करीब एक दशक बाद नगर मेें पधारे तथा यहाॅ का विकास देखकर चकित रह गये। बड़े -बड़े फ्लाई ओवर , शानदार शापिंग माल्स , मल्टी प्लेक्स,  सिनेमाहाल, रामगढ़ताल बनता पर्यटन केन्द्र ...

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