स्वास्थ्य

स्वास्थ्य विभाग की शार्ट फिल्म ‘नमस्ते’ और ‘डेरवा’ ने जीते अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार

गोरखपुर. लॉकडाउन के बीच स्वास्थ्य विभाग की दो अलग-अलग शार्ट फिल्म ‘ नमस्ते ’ और ‘ डेरवा ’ ने टैगोर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बाजी मार ली है। डेरवा फिल्म को फेस्टिवल के सीजन 10 में आउटस्टैंडिंग एचीवमेंट अवार्ड के लिए चुना गया है, जबकि नमस्ते फिल्म को सीजन 11 के तहत पुरस्कार मिला है। कोविड-19 पर आधारित फिल्म नमस्ते यू-ट्यूब के अलावा एमेजॉन प्राइम पर भी उपलब्ध है।

शार्ट फिल्म डेरवा की कहानी उत्तर प्रदेश के पहले नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन (एनक्वास) में चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डेरवा की सफलता पर आधारित है। दोनों फिल्में लोगों को जागरूक करती हैं।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया है कि दोनों फिल्मे स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से क्रियेटिव क्रू ने बनाया था और उसके यू-ट्यूब चैनल पर फिल्म मौजूद है। उन्होंने फिल्म के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले एसीएमओ डॉ. नीरज कुमार पांडेय, क्रियेटिव क्रू से जुड़े अश्विन आलोक, शुभम पांडेय, जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ. मुस्तफा और विभाग के अन्य संबंधित लोगों को बधाई दी है।

उन्होंने बताया कि प्रतिकूल परिस्थितियों में सार्वजनिक की गयी इन फिल्मों के निर्माण में प्रोत्साहन के लिए स्वास्थ्य विभाग जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन का विशेष तौर पर आभारी है। इन फिल्मों का मकसद दृश्य-श्रव्य माध्यम से जनसमुदाय को जागरूक करना रहा है। उन्होंने एसीएमओ आरसीएच डॉ. नंद कुमार और जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद समेत दोनों फिल्मों में प्रत्यक्ष व परोक्ष सहयोग करने वाले सभी लोगों को बधाई दी है।

सीएमओ ने बताया कि शार्ट फिल्म डेरवा कुल 11 मिनट की है। फिल्म के जरिये बताया गया है कि गर्भवती के प्रसव पूर्व जांच से लेकर प्रसव तक और उसके बाद घर छोड़ने तक की सभी सुविधाएं निःशुल्क मौजूद हैं। फिल्म यह प्रेरित करती है कि सुरक्षित प्रसव और टीकाकरण के लिए सरकारी अस्पताल अपने आप में पर्याप्त है और किसी को कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने बताया कि शार्ट फिल्म नमस्ते कोविड-19 पर मिथकों व भ्रांतियों का खंडन करती है और लोगों का उचित मार्गदर्शन करती है। इस फिल्म में स्वास्थ्य विभाग से एसीएमओ डॉ. आईबी विश्वकर्मा,डॉ एन के पांडेय, एनएचएम के डिवीजनल प्रोग्राम मैनेजर अरविंद पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी ए के पांडेय, एपीडेमियोलॉजिस्ट एस के द्विवेद्वी, जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ. मुस्तफा खान, हेल्प डेस्क मैनेजर अमरनाथ जायसवाल, एच एस के के श्रीवास्तव एवं विजय श्रीवास्तव ने प्रमुख भूमिका अदा की है। मुख्य किरदार में अश्विन आलोक हैं जबकि स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) की तरफ से उसके प्रतिनिधि वेद प्रकाश पाठक ने विशेष सहयोग किया है।

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