जीपीएस और टैग लगा हुआ था, एक हफ्ते पहले बरवापट्टी में मिला था इसी तरह का गिद्ध
कुशीनगर. उ०प्र० व बिहार सीमा से सटे नारायणी नदी पार शाहपुर मे शनिवार सुबह जीपीएस व टैग लगा विलुप्त प्रजाति का गिद्ध मिला. ग्रामीणों ने जाल डालकर गिद्ध को पद लिया. वन विभाग ने बाद में गिद्ध को अपने कब्जे में ले लिया. इसके पहले 24 अप्रैल को बरवापट्टी में इसी तरह का गिद्ध मिला था जिसे सरगटिया करन पट्टी स्थित क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय में रखा गया है.
गिद्ध के दोनों पंख में पीले रंग का टैग लगा हुआ है जिस पर अंग्रेजी में C-7 लिखा. गिद्ध के शरीर में ऊपर बेल्ट से जीपीएस बंधा हुआ था. ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों को दी. सूचना के बाद मौके पर वन क्षेत्राधिकारी खड्डा बी के यादव सहित वनकर्मियों ने गिद्ध को अपने कब्जे मे कर लिया. मौके से ही इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गयी. पक्षी को उठाकर रेंज कार्यालय खड्डा लाया गया.
वन क्षेत्राअधिकारी वी के यादव ने बताया कि पक्षी गिद्ध है. उसके दोनों पंखों में टैंग व शरीर पर जीपीएस लगा हुआ है.

इसके पहले 24 अप्रैल को कुशीनगर जिले के बरवापट्टी थाना क्षेत्र के रामपुर पट्टी के पास इसी तरह का गिद्ध मिला था. ग्रामीणों ने उसे पकड कर वन विभाग को सौंप दिया था.
रामपुर पट्टी के पास मिले गिद्ध के बारे में पता चला था कि यह नेपाल के चितवन पक्षी विहार का है लेकिन अभी तक नेपाल ने इस पर दावा नहीं किया है.
स्थानीय लोग इन गिद्धों को जासूसी के लिए इस्तेमाल किये जाने की चर्चा कर रहे हैं जिसमें कोई दम नहीं है. यह व्हाइट ब्लैक गिद्ध है जिसकी संख्या काफी कम हो गयी है.
मिली जानकारी के अनुसार जीपीएस व टैग लगे दोनों गिद्ध नेपाल के चितवन के हैं. वहां पक्षी विज्ञानी गिद्धों पर शोध कर रहे है. चितवन में नेपाल का सबसे बड़ा पक्षी व वन अभ्यारण्य स्थित है जो भारतीय सीमा के नजदीक है. विज्ञानियों ने गिद्धों की ट्रैकिंग के लिए जीपीएस व टैगिंग की है.
पक्षी विज्ञानियों के मुताबिक गिद्ध 170 किमी क्षेत्रफल को कवर कर चुके हैं जिसमे भारत का यूपी के महराजगंज में स्थित सोहगीबरवां जंगल व बिहार के प. चंपारण जिला स्थित वाल्मीकि व्याघ्र वन अभ्यारण्य का क्षेत्र भी शामिल है.
गिद्धों को बचाने व प्रजनन में वृद्धि के लिए चल रही मुहिम व इस पर शोध कार्य के लिए काले व सफेद गिद्धों की निगरानी के लिए उन पर ग्लोबल पोजीशन सिस्टम (जीपीएस) लगाया गया है. जीपीएस के सेटेलाइट ट्रांसमीटर से गिद्धों की लोकेशन ट्रेस होती रहती है. पश्चिम नेपाल क्षेत्र को गिद्धों का सुरक्षित एरिया घोषित किया जा चुका है.
शुक्रवार को ऐसा ही गिद्ध महराजगंज जिले के सोनौली कस्बे में भी देखा गया. नेपाल के गिद्ध सरंक्षण नीति से वहां गिद्धों की संख्या बढ़ रही है.
वन क्षेत्राधिकारी नृपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि अभी गिद्ध को सुरक्षित रखा गया है. नेपाल या किसी संस्था के द्वारा गिद्ध के लिए कोई दावा नही किया गया है. यदि कोई दावा किया गया तो सौंपने के लिए उचित प्रक्रिया अपनाई जायेगी.
