कुशीनगर. बिहार स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की जंगलों में अंजन, साइकस पेक्टीनाटा, रॉक्सबरगाई के पेड़ को दुर्लभ प्रजाति के मानते हुए इन्हें संरक्षित करने की योजना के काम में जुटा हुआ है. इस प्रस्ताव को केंद्र ने हरी झंडी दे दी है. यदि कोई इन पेड़ों का व्यवसायिक प्रयोग करते पर पकड़ा जाता है तो जांच में जिस दिन से दुर्लभ पेड़ों के व्यवसाय के उपयोग की बात साबित होगी उस दिन से पकड़े जाने की तारीख तक प्रत्येक दिन एक लाख जुर्माना लगेगा.
ये पेड वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल परिक्षेत्र मंगुरहा व रघिया मैं कुछ चिन्हित हिस्से में पाए जाते हैं. इन पेड़ों को जैव विविधता के दृष्टिकोण से पर्यावरण दिवस की थीम जैव विविधता बनी है . इसके लिए बायोडायवर्सिटी एक्ट 2002 के सेक्शन 37 में विलुप्त होती प्राकृतिक महत्व को बचाने के लिए इनके पाए वाले जगहों को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया गया है.
अंजन का बायोलॉजिकल नाम हार्ड विकिया बीनाटा है. इस पेड़ का आदिवासी जातियो -थारू ,उरांव, धागंड के बीच बड़ा महत्व है. इस पेड़ में औषधीय गुण पाया जाता है पर लकड़ी व्यवसाई इसका प्रयोग फर्नीचर बनाने में करते हैं .
पाइनस रॉक्सबरगाई का चर्चित नाम चीड है . इसकी पहचान विलियम रॉक्सवर्ग के नाम पर है. औषधीय गुणों से भरपूर इस पेड़ में दर्द नाशक व सूजन दूर करने की क्षमता है. इसके अलावा इसका हर्बल प्रयोग होता है.
साइकस पेक्टीनाटा साइकस की चौथी प्रजाति है जिसे स्कॉटलैंड की वनस्पति विज्ञान फ्रांसिस बुचनन ने 1826 में परिभाषित किया था. यह विलुप्त होती प्रजाति देखने में सजावटी होने के साथ-साथ औषधीय दृष्टि से बेहद खास मानी जाती है.
