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बीएचयू में पीएचडी दाखिले के लिए धरनारत दलित छात्र शिवम सोनकर से मिला आइसा का प्रतिनिधिमंडल

वाराणसी। बीएचयू में पीएचडी दाखिले के लिए धरनारत दलित छात्र शिवम सोनकर से आज आइसा का प्रतिनिधिमंडल मिला। आइसा नेताओं ने कहा कि दलित छात्र को प्रवेश न देना उसे शिक्षा के अवसरों से वंचित करना है।

दलित छात्र शिवम सोनकरअपने पीएचडी दाखिले के लिए धरनारत है। दूसरा रैंक मिलने के बावजूद शिवम सोनकर को दाखिला नहीं दिया जा रहा है जबकि JRF कैटेगरी में विभाग की 3 सीटें खाली छोड़ दी गयी हैं।

आइसा ने कहा कि वंचित समाज का कोई छात्र पढ़ना चाहता है, प्रवेश परीक्षा में अपनी कड़ी मेहनत से दूसरा रैंक हासिल कर उसने अपनी योग्यता भी सिद्ध की है, विभाग में पीएचडी की सीटें भी रिक्त हैं तो ऐसी स्थिति में उस दलित छात्र को प्रवेश न देना उसे शिक्षा के अवसरों से वंचित करना होगा।

दलित समाज को सैकड़ों हजारों वर्षों से अवसरों से वंचित रखा गया है। लंबे संघर्षों के बाद समान अवसर का राजनीतिक अधिकार हासिल हुआ है। विश्वविद्यालय समाज का आईना नहीं बल्कि भविष्य होते हैं। इन संस्थानों का काम समाज के आखिरी व्यक्ति को सशक्त बनाकर मुख्यधारा में लाना है। विडंबना है कि ये विश्वविद्यालय ही सामाजिक बहिष्करण का अड्डा बनते जा रहे हैं।

हम बीएचयू  प्रशासन से मांग करते हैं कि दलित छात्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिवम को तत्काल प्रवेश दिया जाए।

प्रतिनिधिमंडल में आइसा की अखिल भारतीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा, उत्तर प्रदेश सचिव कॉमरेड शिवम, प्रदेश उपाध्यक्ष कॉमरेड रोशन , बीएचयू इकाई अध्यक्ष कॉमरेड राजेश  शामिल रहे।

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