बहराइच। मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र और प्रभागीय वन अधिकारी बी शिव शंकर ने आज संयुक्त रुप से तहसील मोतीपुर अंतर्गत वन भूमि पर बसे गांव सुखडी पुरवा का भ्रमण किया। गांव में पैदल चलकर उन्होंने लोगों की समस्याएं जानी और चौपाल के माध्यम से उनके बन भूमि पर किए गए दावों के बारे में सघन पूछताछ की।
उपस्थित वन निवासियों ने उनके द्वारा किए गए वानिकी कार्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि उनके पूर्वज सैकड़ों वर्ष पूर्व जंगल में टांगिया सिस्टम से वृक्षारोपण करने के लिए पूर्वांचल तथा पश्चिमी बिहार से लाए गए थे। उपस्थित अधिकारियों ने वन अधिकार कानून 2006 के तहत किए दावों में प्रस्तुत किए के साक्ष्यों का परीक्षण किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने वन मजदूरों के द्वारा वानिकी कार्यों में किए गए योगदान पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में अधिकार कानून के अस्तित्व में आने के बाद से वन भूमि पर बसे लोगों के द्वारा उनके निवास तथा खेती की जमीन पर दावे किए गए हैं और कब्जे की जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए वन अधिकार आंदोलन चलाया जा रहा है। वनभूमि पर बसे अब तक 19 गांव में से छह गांव राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं।
उतर प्रदेश सरकार द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश में अभियान चलाकर अब तक 45 गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जा चुका है। गत दिनों मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग में बलहा विधानसभा की विधायक सरोज सोनकर ने जनपद बहराइच अवशेष बचे वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की बात रखी थी जिसके परिपालन में जिला प्रशासन के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है ।
जिला मुख्यालय से 122 किलोमीटर दूर पर बसे सुजौली के गांव सुकड़ी पुरवा में मुख्य राजस्व अधिकारी ने कहा कि वन निवासियों की समस्याओं से शासन को यथा स्थिति से अवगत कराया जाएगा। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी विनोद यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रद्धा पांडे, उप जिला अधिकारी अश्विनी पांडेय, सहायक विकास अधिकारी अशफाक अहमद, उप खंड स्तरीय वन अधिकार समिति के सदस्य कमरूल अंसारी, ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष सरोज गुप्ता, ग्राम प्रधान सुजौली राजेश कुमार गुप्ता, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि चहलवा प्रीतम निषाद, ग्राम प्रधान शिवकुमार, ग्राम पंचायत सचिव सुशील सिंह,दीपक चौधरी आदि मौजूद रहे।