लखनऊ। भाकपा (माले) की राज्य स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) की बैठक में नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में बड़ी संख्या में मदरसों, मस्जिदों व मजारों के ध्वस्तीकरण पर चिंता प्रकट की गई। इसे सरकार की अल्पसंख्यक-विरोधी कार्रवाई बताया गया।
बैठक के फैसलों की जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि बुल्डोजर न्याय पर सर्वोच्च न्यायालय के सख्त दिशा निर्देश के बावजूद मुख्यमंत्री योगी के आदेश पर सैकड़ों मदरसों व मुस्लिम इबादतगाहों का ध्वस्तीकरण किया जाना न्याय का मखौल उड़ाना है और यह अल्पसंख्यकों पर हमले की कार्रवाई है, जो संविधान विरुद्ध है। श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, महाराजगंज, बहराइच, लखीमपुर खीरी व पीलीभीत जिलों में मदरसों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को अनाधिकृत व गैरकानूनी बताकर ध्वस्तीकरण किया गया है। इन मदरसों से जुड़े हजारों छात्रों का शैक्षिक भविष्य भी अंधकारमय हो गया। यही नहीं, बहराइच, भदोही जिलों में गाजी मियां की मजार पर लगने वाले पारंपरिक मेलों को प्रशासनिक अनुमति नहीं देना भी भाजपा सरकार की नफरत व ध्रुवीकरण की राजनीति का परिणाम है।
राज्य सचिव ने कहा कि उक्त जिलों में बुल्डोजर कार्रवाई के बाद के हालात का जायजा लेने के लिए भाकपा (माले) और इंसाफ मंच की टीम इन जिलों का दौरा करेगी।
सुधाकर यादव ने कहा कि बिजली के निजीकरण के विरुद्ध बिजलीकर्मियों व किसानों की 22 जून को होने वाली प्रदेश स्तरीय पंचायत को भाकपा (माले) अपना समर्थन देगी। बिजली का निजीकरण जनविरोधी है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। नौ जुलाई को केंद्र सरकार के चार लेबर कोड सहित मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की आम हड़ताल के आह्वान को सफल बनाने के लिए भाकपा (माले) कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरेंगे।
