जीएनएल स्पेशल

नेपाल बार्डर के सात जिलों में मदरसा , मस्जिदों और मजारों पर कार्यवाही क्यों

जब पूरा देश पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा 26 लोगों की हत्या की घटना पर स्तब्ध और गहरे शोक में था, सभी तबके के लोग एकजुटता प्रदर्शित कर रहे थे उसी वक्त इस घटना को अपने लिए अवसर मानते हुए उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मुस्मिल समुदाय के खिलाफ धार्मिक पहचानों और उनकी संस्थाओं पर हमला तेज कर दिया। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में योगी सरकार ने सुरक्षा और सार्वजनिक भूमि पर कब्जे व अतिक्रमण का हवाला देते हुए नेपाल बार्डर के सात जिलों में मस्जिदों, मदरसो, मजारों व ईदगाहों के ध्वस्तीकरण का अभियान छेड़ दिया। निजी भूमि पर बने मदरसों, मजारों को भी ध्वस्त किया गया। यह अभियान अभी तक जारी है और इस दौरान 300 से अधिक मदरसों, मजारों, ईदगाहों व मस्जिदों पर बुलडोजर चलाने, उन्हें सील करने या अवैध अतिक्रमण घोषित करने की कार्यवाही की जा चुकी है।
यह अभियान 25 अप्रैल से नेपाल बॉर्डर के सात जिलों-महराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, पीलीभीत, खीरी जनपद में शुरू किया गया। अभियान के तहत नेपाल बॉर्डर से 15 किलोमीटर तक के मदरसों, मस्जिदों , मजारों व ईदगाहों पर कार्यवाही की गई। सरकार की ओर से कहा गया कि सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए गए अवैध धार्मिक संरचनाओं पर कार्यवाही की गयी। बिना मान्यता के चल रहे मदरसों को सील करने और उन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई को नियमों और कानूनों के तहत बताया गया।
इस अभियान के एक महीने बाद भी ठीक से नहीं पता है कि कार्रवाई की जद में कितने मस्जिद, मदरसे, मजार व ईदगाह आए हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र आर्गनाइजर में 21 मई को प्रकाशित खबर में कहा गया है कि ‘ उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत-नेपाल सीमा के पास सात जिलों में 286 अनधिकृत धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया है। इस कार्रवाई में 225 मदरसे, 30 मस्जिद, 25 मजार और छह ईदगाह शामिल हैं। खबर में कहा गया है कि यह ध्वस्तीकरण अभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे आदेश के तहत चलाया जा रहा है, जिन्होंने भारत-नेपाल सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का प्राथमिक लक्ष्य अवैध रूप से कब्जा की गई सरकारी और वन भूमि को वापस लेना और सीमा सुरक्षा को बढ़ाना है.। अब तक, क्षेत्र में 429 अतिक्रमण के मामलों की पहचान की गई है, जिसमें 345 अवैध मदरसे शामिल हैं। इसके अलावा, 41 मस्जिदों और 43 मजारों को आगे की कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से 139 मदरसों को पहले ही सील कर दिया गया है। ‘
आर्गनाइजर कहता है कि ये ध्वस्तीकरण अचानक नहीं किए गए। अधिकारियों ने पुष्टि की कि अभियान से पहले कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। शेष मामलों के लिए, वर्तमान में कानूनी कार्यवाही चल रही है। राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कई नोटिस जारी किए गए। पूरे अभियान पर राज्य स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट में योगी सरकार के इस अभियान को ‘ ऑपरेशन क्लीन ’ कहा गया है और लिखा गया है कि अभियान चलाने का निर्देश सीधे मुख्यमंत्री ने दिया।
सरकार की ओर से इस कार्यवाही को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत बताया गया है लेकिन मिली जानकारी के अनुसार पूरी कार्यवाही एकतरफा थी। मस्जिद, मदरसा, मजार और ईदगाह के संचालकों, प्रबंधन समितियों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। आनन-फानन में नोटिस दी गई और बुलडोजर चला दिया गया। कई स्थानों पर मदरसा, मजार की प्रबंध समिति को मजबूर किया गया कि वह अपने भवन खुद गिरा दें।
योगी सरकार की इस कार्रवाई की जद में सबसे अधिक मदरसे आए हैं। सैकड़ों की संख्या में मदरसों को सील कर दिया गया है और वहां पढ़ रहे बच्चों को घर भेज दिया गया है।
बीबीसी हिन्दी में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के सात जिलों में चल रहे इस अभियान की वजह से कई मदरसों में पढ़ाई ठप है। बहराइच जिले के रूपईडीहा से पाँच किलोमीटर पर रंजीतबोझा गांव में स्थित एक मदरसे की जमीन के कागजात सही पाए गए लेकिन मदरसे को मान्यता नहीं थी। मदरसे को सील करने के बाद उसका कुछ हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया। श्रावस्ती के जमुनहा तहसील के बनगाई में दारुल उलूम अरबिया अनवारूल उलूम मदरसे को सील कर दिया गया जबकि मदरसे को मान्यता मिली हुई है। मदरसे को सील करने के लिए यह बहाना बनाया गया कि मदरसा सरकारी जमीन पर बना हुआ है।
यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 से योगी सरकार किसी मदरसे को मान्यता नहीं दे रही है। मान्यता के सैकड़ों आवेदनों पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।
मदरसों को मान्यता देने का काम रोक दिया गया है और मदरसों को बिना मान्यता के चलने वाला बता कर उन्हें ध्वस्त करने या सील करने की कार्यवाही की जा रही है।
योगी सरकार सत्ता में आते ही मदरसों के खिलाफ कार्यवाही में जुट गयी थी। सभी मदरसों का सर्वे कराया गया। उन्हें स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रमों का वीडियो बनाकर देशभक्ति का सबूत देने को कहा गया।
क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार ‘ श्रावस्ती जिले में कुल 297 मदरसे हैं, जिनमें 192 गैर मान्यता प्राप्त हैं। स्थायी और अस्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 105 है। स्थानीय पत्रकार के मुताबिक, प्रशासन ने मई महीने में कार्रवाई शुरू की. करीब 17 दिनों में 20 मदरसे गिरा दिए और 110 मदरसों को सील कर दिया। ‘
क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक श्रावस्ती के जमनहा में रजिया गौसुल उलूम मदरसा के प्रधानाचार्य मोहम्मद नईम ने बताया कि हमारे मदरसे की मान्यता पहले अस्थायी थी लेकिन साल 2012 में स्थायी करा लिया।  रजिस्ट्रेशन भी साल 2027 तक है. मदरसा सरकारी जमीन पर नहीं है। फिर भी हमारे मदरसे को सील कर दिया गया।  मोहम्मद नईम ने बताया कि एक  मई को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तरफ से नोटिस आया, जिसमें लिखा था कि मदरसा अस्थायी मान्यता प्राप्त करके चलाया जा रहा है. पाँच साल के बाद नवीनीकरण कराना आवश्यक है लेकिन 5 साल बाद भी मान्यता नवीनीकरण नहीं कराया गया।  इसलिए मदरसे की शैक्षिक गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है.नोटिस मिलने के 3-4 दिन बाद लेखपाल और कानूनगो पुलिस वालों के साथ आए और मदरसे को सील कर दिया। ‘
 मोहम्मद नईम ने बताया कार्रवाई से पहले हमने लेखपाल को सारे कागज दिखाए। उन्होंने कहा कि कागज सही है लेकिन ऊपर से आदेश है। फिर हमने उसी वक्त एसडीएम साहब से फोन पर बात की। कहा कि हमारे कागज दुरस्त हैं। मदरसा सील न किया जाए। तब एसडीएम साहब ने कहा कल आकर कागज दिखाओ। अगले दिन एसडीएम से मिलो तो उन्होंने कहा कागज ठीक है, लेकिन आपने देर कर दी।
श्रावस्ती के ही एक अन्य मदरसे अहले सुन्नत रजा उल उलूम को भी सील कर दिया गया. जबकि यहां के प्रबंधक अब्दुल हक का दावा है कि उनके पास भी स्थायी मान्यता और रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का पूरा कागज है.
‘ रिजविया गौसिया गौसुल उलूम खलीफतपुर के प्रबंधक कुर्बान अली ने बताया कि मदरसे में करीब 150 बच्चे पढ़ते थे. आधुनिक टीचर भी थे। दो कमरा था। पूरा हॉल था। बड़ा सा गेट था। नोटिस उसी वक्त मिला जब गिराया गया। ‘
‘ ऑपरेशन क्लीन ‘ के तहत  मुस्लिम समाज के ही मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों, मजारों पर कार्यवाही की गयी। दूसरे अतिक्रमण या अवैध संरचनाओं पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। नाम के लिए महराजगंज जिले में कुछ स्कूलों को नोटिस देने की बात सामने आयी है। बहराइच में वन वस्तियों पर रह रहे लोगों को भी उजाड़ा गया है जबकि ये लोग वन अधिकार कानून के तहत वहां रहने के अधिकारी हैं और उन्हें आधिकारिक रूप से रहवासी होने की मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही थी ।इसके बावजूद इस अभियान में उन्हें अतिक्रमणकारी बताते हुए उनके घरों पर बुलडोजर चला दिया गया।
नेपाल बार्डर से सटे जिलों में मुस्लिम आबादी बढ़ने, विदेशी धन की मदद से मस्जिद-मदरसों के निर्माण का दुष्प्रचार लम्बे समय से चलता आ रहा है। योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री नहीं थे तो उन्होंने नेपाल से इस्लामिक आतंकवाद और माओवादी घुसपैठ की बात कहते हुए अपने संगठन हिंदू युवा वाहिनी के जरिए हिंदू सम्मेलन का अभियान चलाया था। अखबारों में भी नेपाल-भारत की खुली सीमा को खतरनाक बताते हुए इस्लामिक आंतकवाद का हौव्वा खड़ा किया जाता रहा है।
अभी हाल में एक अखबार में नेपाल बार्डर के जिलों में मुस्लिम आबादी बढ़ने की खबर छापी थी। इस खबर में कोई तथ्य पेश नहीं किए गए थे और न ही किसी सर्वे या रिपोर्ट का हवाला दिया गया था।
इन खबरों को आधार बनाकर हिंदूवादी संगठन नेपाल बार्डर पर मुसलमानों और उनके धार्मिक स्थलों व संस्थानों पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपनी मांग के अनुरूप कार्रवाई को अंजाम दे दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुलडोजर कार्यवाही के लिए बनाया गया गाइडलाइन भी योगी सरकार की असंवैधानिक कार्यवाही पर रोक नहीं लगा पा रहा है।
( समकालीन जनमत के जून 2025 अंक में प्रकाशित )

Related posts