गोरखपुर। जनवादी लेखक संघ की जिला इकाई द्वारा 24 अगस्त को सिविल कोर्ट बार एसासियेशन, के सभागार में का कविता पाठ का आयोजन किया गया। कवि विनय मितवा ने फतवा, पागल, रेड सिगनल, इंतजार, देवता, संरक्षक शीर्षक सहित 12 कविताओं का पाठ किया।
उन्होंने पहली कविता पढ़ी-
पत्थरों के शहर में तुम्हारा स्वागत है /आगे, और आगे भागने की दौड़
में/मुझे ध्यान ही रहा/मॉ,भाई और बहन/कहीं पीछे छूट
गए/पत्थरों के शहर में /
एक दूसरी कविता इस प्रकार है :-ं
बादल से दिखने वाले एक आदमी में/दिख जाता है/एक ठीक ठाक इंसान/बाहर आ
चुका होता है/उसके बीच का गुप्त इंसान
कवि धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने 15 कविताएं -तुम्हारा होना,आत्मबोध, हवा, पीछे और पीछे, तब बात बने, मन, दीवार भर की
दूरी, वे निकल नहीं पा रहे हैं पढ़ीं।
उनकी एक कविता यह थी –
तुम्हे नहीं पता/जीवन का मूल सोता/तुम्ही हो/तुम्हारा होना मेरा होना
हैे /साये में धूप की तरह
हवा जो बहाई जा रही है इन दिनों/वो हमें कहॉ ले जायेगी/परिचित या
अपरिचित का होना अब /कोई मायने नहीं रखता
कविता पाठ के बाद बातचीत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कथाकार एवं नाट्य लेखक राजाराम चौधरी ने कहा कि जनवाद की आज बहुत जरूरत है। यह जनवाद हमारे कविताओं और कहानियों में पुरजोर तरीके से उपस्थित होना चाहिए । यह जनवाद की प्रतिरोध की ताकत को मजबूत करता है। आज पढ़ी गयी कविताओं में जनवाद की गूॅज साफ-ंसाफ सुनाई दे रही है । मितवा के कविताओं में से ‘ रेड सिगनल ‘ की चर्चा करते हुए उन्होने की कहा कि रेड सिगनल को ही आगे बढ़ाना है। यह प्रतिरोध की ताकत है।

कवि एवं जलेस के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने अल्बैर कामू के अस्तित्वाद की चर्चा करते हुए कहा कि आज की कवियाएं अस्तित्ववाद के करीब-ंकरीब हैं । कामू के उपन्यासों से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कवि द्वय के पाठ से उसे जोड़ते हुए श्री कुमार ने कहा कि ऐसी कविताओं की हमारे जीवन को बहुत जरूरत है।
फिल्मकार प्रदीप सुविज्ञ ने फिल्मों के उदाहरण द्वारा कविताओं के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। विनय मितवा के कविता ‘फतवा ‘ की चर्चा करते हुए कहा कि निरीह लोग ही फतवा की जद में आ जाते हैं और उसके शिकार हो जाते हैं ।
डॉ.रंजना जायसवाल ने अपने समय और समाज को बढ़ाने में साहित्य की भूमिका को सराहा और कहा कि साहित्य की रचना हम जिसके लिए करते हैं उसे ही यह तंत्र हमसे अलग थलग करने में लगा है। कथाकार राणा प्रताप और सत्य नरायण पथिक ने भी अपनी बात रखी।
कार्यक्रम का संचालन जलेस के अध्यक्ष जय प्रकाश मल्ल ने किया, कवि एवं जलेस के सचिव वेद प्रकाश ने कार्यक्रम में आए लोगों को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में श्याम मिलन एडवोकेट, गजलगो अरूण कुमार श्रीवास्तव, सेानाली श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, विनोद श्रीवास्तव, राकेश कुमार श्रीवास्तव, सीपीएम के रामवचन, किसान सभा के विकास दूबे, सुनील शर्मा, कामरेड शंकर, कॉमरेड रमाशंकार, रूबी (जनचेतना), कुमार अभीनीत, सृजन गोरखपुरी साथ ही शहर के कवि-साहित्यकार मौजूद रहे।
