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‘ एलन मस्क को सोशलिस्टों के भय से नहीं आती नींद, इसलिए सोशलिज़्म को कर रहे बदनाम  ’

पटना। अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क द्वारा सोशलिस्ट विचारधारा की हिटलर से तुलना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कहा कि पूंजीवादी ताकतें सोशलिस्ट विचारधारा से भयभीत हैं। एलेन मास्क और उनके आका डोनाल्ड ट्रम्प को एकमात्र सोशलिस्ट विचारधारा के भय से रातों में नींद नहीं आती है। इसलिए वे अभी से ही सोशलिस्टों को बदनाम करने की साजिश में लग गये हैं।
प्रदेश अध्यक्ष, बिहारसोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जिस प्रकार अमेरिका, भारत सहित विश्व के कई देशों में अप्रत्यक्ष रूप से उद्योगपतियों ने लोकतंत्र पर कब्जा कर लिया है एवं अपने अनुसार राष्ट्राध्यक्षों की नियुक्तियाँ करवा रहे हैं, ऐसे में आम लोग रिमोट का खिलौना बनकर रह गये हैं। अधिकतर देशों में उद्योगपति अपने रबड़ स्टांप नेताओं को पैसे और आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बनवा दे रहे हैं। आम जनता द्वारा सरकार चुनने के लिये वोट डालने-गिनने इत्यादि की प्रक्रियाएँ एक फॉल्स फॉर्मलिटी बन कर रह गई हैं। 

उन्होंने कहा कि इन हालातों की सामाजिक प्रतिक्रियास्वरूप निकट भविष्य में दुनिया भर में सोशलिस्ट आंदोलनों का आविर्भाव स्वाभविक हो गया है जिसका अंदाज एलन मस्क सहित शोषक मानसिकता वाले सभी शीर्ष उद्योगपतियों हो चुका है। इन उद्योगपतियों ने अपना यह आकलन डोनाल्ड ट्रम्प, नरेन्द्र मोदी जैसे अपने-अपने करीबी रबड़ स्टांप नेताओं को भी बता दिया है।

पूँजीवादियों को भय है कि सोशलिस्ट आंदोलन हुआ तो इन सबकी जैसे-तैसे लूटी गई अथाह संपतियों का आम लोगों में वितरण हो जायेगा। इसी बेचैनी में इन लोगों ने अभी से ही सोशलिस्ट विचारधारा को बदनाम करने का अभियान शुरू कर दिया है।

सोशलिस्टों की तुलना हिटलर से करके पूँजीवाद अभी से ही अपने बचाव की तैयारी में लग गया है। किंतु इसका बहुत ज्यादा कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि हर अति का अंत सुनिश्चित होता है। जिस प्रकार दुनिया भर में पूँजीवाद चरम पर पहुँच गया है, वैसे में आम लोगों की प्रतिक्रिया स्वाभविक है।

सोशलिस्ट नेताओं ने तमाम पूंजीपतियों को सलाह देते हुए कहा कि अगर एलन मस्क जैसे पूंजीपति अपना-अपना बचाव चाहते हैं तो सोशलिस्ट विचारधारा को बदनाम करने के बजाय उन्हें अपने-अपने व्यवसाय की नीति में बदलाव कर उसे जनकल्याण के उद्देश्य से कार्य करना चाहिए ताकि समाज को टकराव की स्थिति से बचाया जा सके।

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