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भाकपा (माले) ने डीजल-पेट्रोल के 11 दिनों में चौथी बार दाम बढ़ाने की आलोचना की

लखनऊ। भाकपा (माले) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने और भारतीय तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ने की ताजा रिपोर्टों के बीच, डीजल-पेट्रोल की कीमतों में गुजरे 11 दिनों में आज चौथी बार बढ़ोतरी करने के फैसले को समझ से परे और जनता पर अनावश्यक आर्थिक भार डालने वाला कदम बताया है।

पार्टी की राज्य इकाई ने पेट्रोल और डीजल के दाम में क्रमशः ₹ 2.61 और ₹ 2.71 प्रति लीटर की ताजा वृद्धि सहित 11 दिनों में कुल ₹ 8 प्रति लीटर की वृद्धि को पहले से ही आसमान छूती महंगाई को और बढ़ाने और जनता की कमर तोड़ने वाला निर्णय बताया। सीएनजी की कीमत भी ₹4 प्रति किलो बढ़ गई। परिवहन और पहले से ही संकटग्रस्त कृषि की लागत में और वृद्धि हुई है।

माले ने कहा कि तेल-गैस की कीमतों में वृद्धि के पीछे ईरान युद्ध का प्रभाव बहाना है, जबकि असल में यह सरकार की आर्थिक व वैदेशिक नीतियों की विफलता का प्रमाण है। सरकार तेल पर भारी भरकम टैक्स जारी रख कर और लगातार किस्तों में मूल्यवृद्धि कर कम्पनियों की मुनाफा लूट को जारी रखना चाहती है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद से ही जनता से यह वसूली शुरु हो गई है।

पार्टी ने आगे कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जंगखोर इजरायल और साम्राज्यवादी अमेरिका से दोस्ती गांठने और उसके आगे नतमस्तक होने का खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। अमेरिकी फरमान के आगे केंद्र सरकार बेबस है। नीतियों की विफलता का भार जनता पर डाला जा रहा है। अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल-गैस के दाम जब काफी कम हुआ करते थे, उस समय भी इनपर टैक्स की मात्रा घटाकर जनता को इसका लाभ नहीं दिया गया। माले ने यह मूल्यवृद्धि तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।

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