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सुविधाओं की कमी और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की अनिवार्यता पर पर पीएचडी शोधार्थी ने सवाल उठाए

गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक पीएचडी शोधार्थी द्वारा विश्वविद्यालय में  24×7 लाइब्रेरी, शौचालय, हॉल, कंप्यूटर सुविधाओं की कमी और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की अनिवार्यता पर सवाल उठाया है, इस बारे में पीएचडी शोधार्थी द्वका सोशल मीडिया पर काही गईं बातें वायरल हो गई है।

पीएचडी शोधार्थी ने वायरल वीडियो में कहा है कि विश्वविद्यालय में आधारभूत सुविधाओं-24×7 लाइब्रेरी, उचित शौचालय, हॉल, पर्याप्त कंप्यूटर तथा विश्वसनीय बिजली का अभाव है।

इसके बावजूद , विश्वद्यालय प्रशासन ने पीएचडी  शोधार्थियों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अटेंडेंस का नियम लगाया गया है। बायोमीट्रिक न होने पर  शोधार्थियों के जेआरएफ फॉर्म में साइन नहीं करके फेलोशिप रोकने की धमकी दी जाती है।

 पीएचडी शोधार्थीका कहना है कि छात्र-छात्राओं को जेआरएफ शोध कार्य हेतु मिलती है लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में छात्रों को अन्य विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में जाना पड़ता है। अनिवार्य बायोमेट्रिक से शोधार्थियों की शोध की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पद रहा है। ऐसे नियम नई शिक्षा नीति के विरुद्ध हैं। विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का अभाव है, इसीलिए सभी शोधार्थी अनिवार्य बायोमेट्रिक नहीं चाहते हैं, जहां शोध, शोधार्थी केंद्रित न होकर , संस्था केंद्रित किया जा रहा है।

शोधार्थी ने कहा कि हम गोरखपुर विश्वविद्यालय के सभी शोध छात्र , विश्वद्यालय अनुदान संस्था का इस संबंध में स्पष्टीकरण चाहते है जो शोधार्थियों के हित में हो। पीएचडी  शोधार्थियों के हित में तत्काल बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए तथा शोधार्थियों के लिए न्यूनतम आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।