पदयात्रा को रोकने पर नॉर्मल ग्राउंड में हुआ सम्मेलन,  बुद्धालैण्ड राज्य के मांग उठाई गई

गोरखपुर। पूर्वांचल सेना द्वारा पूर्वी प्रदेश के 27 जिलों को बुद्धालैण्ड के नाम अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर एक जनवरी को पूर्वांचल सेना की पदयात्रा को प्रशासन ने कोरोना का हवाला देते हुए नार्मल ग्राउन्ड में पदयारोक दिया।  नार्मल ग्राउंड के चारों और फोर्स लगाकर बुद्धालैण्ड पदयात्रा में शामिल होने आए हुए लोगों को अंदर जाने से रोका गया। इसके विरोध में पूर्वांचल सेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं नारेबाजी करते हुए नॉर्मल ग्राउन्ड में ही सम्मेलन किया।

पूर्वांचल सेना अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि पूरे देश में प्रशासन कोरोना वायरस लेकर लोकतंत्र को खत्म कर रही है, कोरोना का बहाना लेकर सरकार लोगों आवाज को कुचल रही है, जबकि सरकार के मंत्री लगातार अपना रैलियां और स्वागत समारोह कर रहे हैं। उन्होंने कहा की प्रशासन लाठीचार्ज पर उतारू है और हमें बुद्धालैण्ड हेतु पदयात्रा में आये बुजर्गों और महिलाओं का ध्यान रखना है, इसलिए हम यही सम्मेलन कर अपनी बुद्धालैण्ड की मांग रखेंगे । उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बनने से पहले योगी आदित्यनाथ लगातार अलग राज्य की मांग उठाते थे लेकिन सरकार में आते ही उनका रंग बदल गया है और अब वह अलग राज्य आंदोलन को ही खत्म करना चाहते हैं, लेकिन हम इस आंदोलन को रुकने नहीं देंगे हर हाल में उत्तर प्रदेश में अलग बुद्धालैंड राज्य बनाकर दम लेंगे ।
इसके बाद बारी-बारी से 27 जिलों के आए प्रतिनिधियों ने अपनी बातों को रखा।

पूर्वांचल सेना मऊ जिला अध्यक्ष संतोष धरिकार ने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी देश के बाहर जाते हैं तो अपने को बुद्ध के देश से आया बताते हैं लेकिन आज उनकी पार्टी की सरकार के द्वारा बुद्ध के जन्म स्थल और कर्म स्थल के विकास को रोका जा रहा है। उनकी पार्टी की सरकार द्वारा बुद्धालैण्ड की मांग को रोका जा रहा है ।

महाराजगंज जिला अध्यक्ष बुद्धिसागर सिंह ने कहा कि सरकार जानबूझकर उत्तर प्रदेश को लेबर जोन बनाए रखना चाहती है। यहां के किसी भी संसाधन का उचित दोहन और नियोजन नहीं किया जा रहा है जिसका प्रमाण है कि हमारे लोग शिक्षा चिकित्सा रोजगार आदि मूलभूत सुविधाओं के लिए भी अन्य राज्यों के ऊपर निर्भर हैं।

आजमगढ़ से आए राजीव यादव ने कहा कि जब 2011 में ही उत्तर प्रदेश को बांटने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की विधानसभा से भेजा जा चुका है तो फिर केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण कार्य को क्यों टाल रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भारी भरकम आबादी के नाते उत्पन्न दुश्वारियां का निदान छोटे राज्यों के निर्माण से ही संभव है लेकिन आज प्रशासन में बुद्धालैण्ड राज्य के लिए होने वाली पदयात्रा को रोक कर बता दिया है कि सरकारों की मंशा इस क्षेत्र को पिछड़ा और मजदूर क्षेत्र बनाए रखने की है।

सम्मेलन में शामिल होने आए पूर्व मंत्री जी एम सिंह ने कहां की ढाई हजार वर्ष पूर्व इस क्षेत्र से निकले बुद्ध ने पूरी दुनिया में समता स्वतंत्रता ने और बंधुत्व स्थापित किया जिसकी जरूरत आज पूरे देश को है लेकिन शोषण अन्याय अत्याचार करते हुए अपना खजाना भरने वाले लोग नहीं चाहते कि यह क्षेत्र विकसित हो उन्होंने कहा कि बुद्धालैण्ड राज्य का निर्माण क्षेत्र की तस्वीर को बदल सकता है। आने वाले समय में बुद्धालैण्ड राज्य की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा ।

जिलाध्यक्ष संतकबीर राजेश गौतम, जिलाध्यक्ष सिद्धार्थनगर राजेंद्र कुमार भारती और जिलाध्यक्ष देवरिया राकेश रावण , जिलाध्यक्ष गाजीपुर डॉक्टर किशन चंद ने कहा कि बुद्धालैण्ड राज्य ही हमारा भविष्य उज्ज्वल बना सकता है। राज्य के छोटा होने से शासनिक- प्रशासनिक संचालन बेहतर होगा, आम आदमी की सहूलियत बढ़ेगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी। इसके साथ-साथ बुद्धालैण्ड के नाम से राज्य का निर्माण होते होते ही यह क्षेत्र दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए तीर्थ के रूप में उभरकर सामने आएगा। देश का सर्वाधिक पिछड़ा क्षेत्र देश का सबसे विकसित क्षेत्रों में गिना जाने लगेगा और यह पर्यटन उद्योग के साथ-साथ अन्य उद्योगों को भी बड़ा अवसर मिलेगा ।

इसी दौरान मौके पर पहुंच कर सिटी मजिस्ट्रेट गोरखपुर ने आंदोलनकारियों का ज्ञापन लिया और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी मांग से सरकार को अवगत कराया जाएगा।
पदयात्रा के संयोजक गोरखपुर जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र वाल्मीकि ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

इस अवसर पर डॉ दुर्गा प्रसाद यादव, योगेंद्र नीरज, विजय श्रीवास्तव, अविनाश गुप्ता, प्रणय कुमार श्रीवास्तव, प्रो0 हितेश सिंह, रामजन्म निषाद, रविन्द्र गौतम, पवन कुमार, अखण्ड मित्रा, सत्येंद्र निगम, विवेक वर्मा, अमरनाथ वाल्मीकि, आलोक वर्मा, डॉ विजयश्री मल्ल, कुमारी प्रियंका, संध्या पासवान, ज्योति पासवान, पिंकी भारती, भंते उत्तरानंद, अशोक यादव, विजेंद्र अग्रहरि , सत्येंद्र भारती, धर्मेंद्र बौद्ध समेत सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे ।