नफरत फैलाने वालों को दुनिया कभी याद नहीं करती है: डाॅ विनोद मल्ल
नागेन्द्र नाथ सिंह स्मृति समारोह में ‘ भारतीय राजनीति में आध्यात्म की धारा और परम्परा ‘ विषय पर व्याख्यान
गोरखपुर। राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि जो सबके कल्याण, लौकिक हित के लिए है, वही अध्यात्म है। करूणा, दया, समता होने का भाव ही अध्यात्म है। हमारे देश में अध्यात्म की धारा बहुत सुदृढ रही है और राजनीति पर गहरा असर रहा है। हमारी आध्यात्मिक परम्परा ने बताया कि धन, सम्पदा नहीं नैतिकता और चरित्र किसी देश की ताकत होती है और इसी ताकत के बदौलत महात्मा गांधी ने सबसे अंधेरे समय में देश को अंधेरे से निकाला था। आज उसी धारा को मजबूत करने की जरूरत है।
राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश आज नवें नागेन्द्र नाथ सिंह स्मृति समारोह में ‘ भारतीय राजनीति में आध्यात्म की धारा और परम्परा ‘ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि व्याख्यान दे रहे थे। उपसभापति ने यह व्याख्यान ऑनलाइन दिया।
उन्होंने कहा कि राजनीति की दो धाराए प्रमुख रही हैं। एक धारा सत्ता पाने के लिए सब कुछ भी करने को जायज ठहराती है। इस सिद्धांत को मैकियावेली ने प्रतिपादित किया लेकिन इस सिद्धांत के खिलाफ सबसे मजबूत और प्रखर आवाज हिन्दुस्तान से महात्मा गांधी ने उठायी और कहा कि राजनीति में साध्य और साधन दोनों पवित्र होने चाहिए। महात्मा गांधी ने राजनीति में नैतिक बल, चरित्र, सादगी, सत्य और अहिंसा को स्थापित करते हुए ब्रिटिश साम्राज्यवाद को पराजित किया। महात्मा गांधी ने कहा कि सदाचार, सादगी केवल सन्यासी की सम्पत्ति नहीं है और सन्यासी वही नहीं जो एकांती हो बल्कि वह जो औरों की चिंता करे। राजनीति की इस धारा ने आजादी के आंदोलन में बड़े नेता दिए। राजनीति की इस धारा ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया। इसी धारा को देख विदेशी चिंतकों ने कहा कि पूरब से एक नई रोशनी निकली है जो पाश्चात्य भोगवादी संस्कृति को चुनौती देगी।
श्री हरिवंश ने कहा कि आज टेक्नोलाजी ने दुनिया का बदल दिया है। सब कुछ वही तय कर रहा है। अब आर्टीफिशयल इंटेलीजेंस की बात हो रही है। ऐसे रोबोट बनाए जा रहे हैं जो मनुष्य से ज्यादा सक्षम हैं लेकिन इसके अपने खतरे हैं जिसके प्रति वैज्ञानिक और विद्वान आगाह कर रहे हैं। आज उपभोक्तावाद, पर्यावरण और टेक्नोलाजी पर गहराई से मंथन की जरूरत है। अतिरेक पृथ्वी, पर्यावरण और व्यवस्था सभी के लिए खतरनाक है। भारत की परम्परा सम्यक की है। हमें राजनीति में चरित्र को पूरी ताकत से स्थापित करना होगा और नैतिक उष्मा की ओर लैटना होगा तथी व्यवस्था व राजनीति निखरेगी।
विशिष्ट अतिथि गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक डाॅ. विनोद मल्ल ने कहा कि हिन्दुस्तान और पाश्चात्य दार्शनिक परम्परा मे एक खास अंतर यह है कि पाश्चात्य दर्शन परम्परा किताबों तक सीमित रही वहीं हिन्दुस्तान की आध्यात्मिक परम्परा लोगों के जीवन से जुड़ी। हमारे जितने भी बड़े समाज सुधारक हुए, वे सभी संत प्रकृति के रहे और उन्होंने आध्यात्म को मंदिर-मस्जिद, पहाड़ों-गुफाओं तक सीमित न रखकर जिंदगी से जोड़ा। हमारे देश का आध्यात्म का मुख्य संदेश यही है कि सभी जन एक हैं और सब बराबर हैं। बुद्ध, गोरखनाथ, कबीर, नानक सभी ने यही बात कही।
उन्होंने देश में जाति और धर्म के नाम पर हिंसा की घटनाओं की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि नफरत फैलाने वालों को दुनिया कभी याद नहीं करती है। शांति, प्रेम, अहिंसा, मानवता के लिए कार्य करने वाले ही याद किए जाते हैं। हमारे देश की पहचान और ताकत शांति, अहिंसा, प्रेम, सद्भाव, विविधता, सहिष्णुता में है और हमें इसे हर हालत में बरकरार रखना होगा। उन्होंने कहा कि आज महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद सहित देश के तमाम महापुरूषों व मनीषियों को एक खास खांचे व पहचान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है जिसके खिलाफ हमें खड़ा होना होगा।
डाॅ विनोद मल्ल ने स्वामी विवेकानंद के हवाले से कहा कि देश में यदि भूख, गरीबी है, किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी की हालत खराब है तो राजनीति और आध्यात्मिकता किसी काम की नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में जिस तरह का ध्रुवीकरण, आक्रामकता और विचारों मन कट्टरपन देखा जा रहा है, वह बहुत खतरनाक है। यह आध्यात्मिक रिक्ति का परिणाम है जिसके बारे में जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि तकनीक के उच्चतम विकास की स्थिति में यह स्थिति आ सकती है। इसके लिए जरूरी है कि हम इतिहास, संस्कृति को जाने-समझें और बुद्ध, गोरखनाथ, कबीर, महात्मा गांधी, डाॅ अम्बेडकर के विचारों से प्रेरणा लेते हुए कार्य करें।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि आध्यात्म, आत्मा और आत्म से सम्बन्धित है जबकि राजनीति भौतिक जगत की चीज है फिर भी दोनों में समन्वय की कोशिश की गई है। बुद्ध, स्वामी विवेकानंद और महात्मा बुद्ध ने व्यक्ति और पवित्रता को आत्मा से जोड़ा। आध्यात्मिक परम्परा वह है जो पवित्रता के साथ राजनीति में आती है और समष्टि को पवित्रता के लिए प्रेरित करती है। गांधी इसी परम्परा में है और इसलिए उन्होंने कहा कि राजनीति को धर्म प्रधान होना चाहिए। वे धर्म की बहुत व्यापक अर्थों में व्याख्या करते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म के मूल अर्थो को स्वीकार करते हुए अपनी जिम्मेदारी का वहन करते हुए पवित्रता का पालन करते हुए राजनीति को लेकर चलना ही आध्यात्मिक परम्परा है।
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम के आयोजक राजेश सिंह ने कहा कि देश की आजादी के लिए लाखों-करोड़ों लोगों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देना होगा। हमें देश के संविधान, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और लोगों के मान-सम्मान के लिए लड़ना होगा। देश में नफरत की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं हैं।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकार एवं रंगकर्मी डाॅ मुमताज खान ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में बुद्ध से कबीर तक बैंड ने भजन प्रस्तुत किए।
