गोरखपुर में 333 और सिद्धार्थनगर में 407 गांव बाढ़ से प्रभावित, नाव पलटने से महिला और बच्चे की मौत

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया

गोरखपुर / सिद्धार्थनगर। बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित गोरखपुर और सिद्धार्थनगर जिले में नदियों के जलस्तर में कमी आयी है लेकिन अभी भी वे खतरे के निशान से उपर बह रही हैं। बाढ़ की स्थिति जस की तस है। गोरखपुर में 333 और सिद्धार्थनगर में 407 गांव बाढ़ से प्रभावित है। गोरखपुर के खजनी क्षेत्र में शनिवार को एक डोंगी नाव के पलट जाने से एक महिला और उसके छह वर्षीय भतीजे की मौत हो गयी। एक दिन पहले बांसगांव क्षेत्र में महिला और उसके छह माह की बेटी की बाढ़ के पानी में गिरने से मौत हो गई थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सिद्धार्थनगर और गोरखपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रोें का दौरा किया। उन्होंन कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों की हर स्तर पर मदद की जाएगी। बाढ़ से जिनके घर गिए हैं उन्हें मुआवजा के अलावा अवास भी दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ पूर्व तैयारियों के कारण बाढ़ से कम नुकसान हुआ है जबकि इस बार नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया था।

गोरखपुर जिले में राप्ती और रोहिन नदी का जलस्तर कम होने लगा है लेकिन अभी भी दोनों नदियां खतरे के निशान से उपर बह रही हैं। शनिवार को जिले में किसी तटबंध के क्षतिग्रस्त या टूटने की खबर तो नहीं आयी लेकिन तटबंधों में रिसाव कई स्थानों पर हो रहा है। शनिवार को बड़हलगंज क्षेत्र में राप्ती नदी पर बने मझवलिया-आछीडीह-नवलपुर तटबंध पर बैरियाडीह गांव के पास रिसाव होने लगा। इससे ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीण अपने प्रयास से रिसाव रोकने में जुटे हैं। बेला-मलाव तटबंध पर भी रिसाव की खबर है।

बड़हलगंल से देवरिया जाने वाले रामजानकी मार्ग पर नेतवार के पास राप्ती नदी का पानी ओवरफलो कर रहा है।

गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर आवागमन अभी भी रूका हुआ है। कौड़ीराम से कसिहार के बीच सड़क पर कई स्थानों पर राप्ती और आमी नदी का पानी बह रहा है। गोरखपुर खजनी मार्ग पर मंझरिया के पास आमी नदी का पानी बह रहा है। इसलिए इस सड़क पर भी आवागमन बंद है।

शनिवार की रात खजनी क्षेत्र के महुआडाबर गांव से एक डोंगी नाव से सड़क पर आने की कोशिश कर रही महिला और उसके छह वर्षीय भतीजे की नाव पलटने से मौत हो गई। सहजनवा क्षेत्र के बड़गहन निवासी धर्मेन्द्र निषाद की 30 वर्षीय पत्नी पिंकी अपने मायके महुआडाबर आयी हुई थी। गांव में बाढ़ आने से शनिवार की रात वह एक डोंगी नाव में भतीजे विवेके को लेकर सड़क की तरफ जा रही थी। नाव बुधई चला रहे थे। सड़क पर पहुंचने के पहले नाव पलट गयी और तीनों गिर गए। बुधई किसी तरह बाहर निकल गए और शोर मचाया। जब तक पिंकी और विवेक का बाढ़ के पानी से बाहर निकाला जाता, दोनों की मौत हो चुकी थी।

एक दिन पहले शुक्रवार की शाम चाड़ी गांव के मैना टोला में बाढ़ के पानी में गिरने से 27 वर्षीय कंचन और उसके छह माह की बेटी की मौत हो गई थी। कंचन की गोद से उसका बेटी फिसल कर पानी मे गिर गई थी। कंचन उसे बचाने के लिए बाढ़ के पानी में कूद गई लेकिन वह अपनी बेटी को बचा नहीं सकी और खुद भी डूब गई।

शनिवार को गोरखपुर जिले में 29 और गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं । जिल में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 333 हो गयी है। सबसे अधिक 73 गांव गोरखपुर सदर तहसील में बाढ़ प्रभावित हैं। गोला तहसील के 71, सहजनवा के 37, कैम्पियरगंज के 51, चौरीचैरा के 28, खजनी के 31 और बासगांव के 42 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।

जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में 431 नाव लगायी गयी है और अब तक 31800 खाद्यान्न किट बाढ़ प्रभावितों में बांटे गए हैं।

सिद्धार्थनगर 

सिद्धार्थनगर जिले की प्रमुख नदियांे के जल स्तर में कमी आनी शुरू हुई हैं लेकिन तीन नदियां अभी भी खतरे के निशान से उपर हैं। राप्ती, बूढ़ी राप्त और कूड़ा नदी खतरे क निशान से उपर बह रही है जबकि जमुआर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है।

सिद्धार्थनगर जिले में 470 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं जिसमें 181 गांव सम्पर्क से कट गए हैं। पूरे जिले में करीब दो लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। बांसी, डुमरियागंज, नौगढ व उसका क्षेत्र बाढ़ से विशेष रूप से प्रभावित है। नौगढ़ क्षेत्र के 76 राजस्व गांव बाढ़ से प्रभावित है। बांसी नगर के आधा दर्जन मुहल्लों में राप्ती नदी का पानी आ गया है। जोगिया-पकड़ी मार्ग पर पानी बह रहा है। कूड़ा नदी पर बना सेमरा पुल का एप्रोच ध्वस्त हो गया है। कई स्थानों पर लोगों को नाव व राहत सामग्री नहीं मिली है जिससे उनमें नाराजगी है। मन्नीजोत क्षे़त्र में बाढ़ प्रभावित लोगों ने नाव नहीं मिलने पर प्रदर्शन भी किया।