साहित्य - संस्कृति

कवि -इतिहासकार डा. राजवन्ती मान को दिया गया ‘आयाम सम्मान ’

” हाँ या ना के बीच
एक गहरा स्लेटी सागर होता है
जिसे पार करने में
बार बार डूबना उतरा ना होता है
एक शब्द से परे वह
एक कहानी का आरम्भ या अंत होता है “

इन काव्य पंक्तियों की रचइता, चंडीगढ़ से आयीं कवि, शोधकर्ता और खोजी इतिहासकार डॉ राजवन्ती मान पाँच अक्टूबर को  “आयाम ” सम्मान 2025 से नवाज़ी गयीं।

एम एस आई इंटर कॉलेज के पुस्तकालय भवन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गोरखपुर विश्व विद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. चन्द्रभूषण अंकुर ने कहा कि डा. मान ने अपने लगन और परिश्रम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लिखे मगर ज़ब्त कर लिये गये गुमनाम साहित्य की खोज करके न केवल साहित्य बल्कि इतिहास का दायरा बड़ा किया है।

आयाम के संयोजक देवेन्द्र आर्य ने डा. राजवन्ती का सम्मान करते हुए कहा कि उन्होंने यहाँ आकर न केवल “आयाम” बल्कि गोरखपुर का मान बढ़ाया है।

इस अवसर पर राजवन्ती जी ने अपने इतिहास और साहित्य लेखन के उद्देश्य और अनुभवों को विस्तार से साझा किया और अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया।

समारोह में डा. गौर हरि बेहरा, डा. वेदप्रकाश पाण्डेय, रंजना जायसवाल, प्रदीप सुविज्ञ, डा. भारत भूषण, अशोक चौधरी, राजाराम चौधरी, आई.एच.सिद्दीकी, सुभाष चौधरी, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, डा. फूल चन्द्र गुप्त, जगदीश लाल श्रीवास्तव, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, रवीश जी आदि की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही।

कार्यक्रम का संचालन अजय कुमार सिंह ने किया।