गोरखपुर। प्रेस क्लब सभागार में पाँच जुलाई को युवा कवि केतन यादव को 5 वां आयाम सम्मान 2026 प्रदान करते हुए पटना से आए कवि – सम्पादक राजकिशोर राजन ने कहा कि केतन यादव की कविताएँ उतनी ही नहीं है जितनी वो दिखती हैं। उनकी कविताएँ एक साथ अपनी सुदीर्घ काव्य परम्परा के साथ ही अपनी मिट्टी से भी जुड़ती हैं। श्रीकांत वर्मा की काव्य पंक्ति –‘चाहता तो मैं भी बच सकता था/ लेकिन जो बचेगा वो रचेगा कैसे’ उद्धृत करते हुए राजन जी ने कहा कि केतन अभिव्यक्ति का ख़तरा उठाने वाले कवि हैं।
वरिष्ठ आलोचक डा. अरविंद त्रिपाठी ने केतन की कविताओं में पूर्वांचल की भाषिक सुगंध को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी कवि को अपनी स्थानीयता, लोकेल का पता देना चाहिए। डा. गौर हरि बेहरा ने कहा कि केतन की कविताएँ सुनते हुए क्रांतिकारी कवि पाश की स्मृतियाँ उभरती हैं।
यह पहली बार था कि आलोचक डा. अनिल राय ने केतन के लिखित वक्तव्य – ‘मेरी कवि क्यों सुने’ के समानांतर ‘मैं केतन की कविताएँ क्यों सुनूं ‘ शीर्षक लिखित वक्तव्य का वाचन किया और उनके कवि की विकास यात्रा पर आश्वस्ति व्यक्त की।

डा. चितरंजन मिश्र ने कहा कि किसी कवि का महत्व उसके काव्य जीवन और व्यक्ति स्तर पर सामाजिक जीवन के फासले से निर्धारित होता है। केतन अपनी इस युवा उम्र में ही सांस्कृतिक वर्चस्व के प्रतिरोध में खड़े दिखते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में ‘आयाम’ के संयोजक देवेन्द्र आर्य ने केतन यादव को उत्तरीय और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
उसके बाद केतन यादव ने अपने लिखित वक्तव्य और दसेक कविताओं का पाठ किया।
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि प्रमोद कुमार ने और संचालन अजय कुमार सिंह ने किया।
