लखनऊ, 8 जुलाई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने मेरठ में मृतक दलित छात्रा ललिता गौतम को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर आयोजित प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे न्याय की मांग को बलपूर्वक दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है।
पार्टी ने कहा कि छात्रा की कथित गैंगरेप और हत्या की जघन्य घटना को डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सका है। अपराध में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक न होना और पीड़ित परिवार को लगातार न्याय के लिए भटकना पड़ना प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सरकार के दलित न्याय संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने जारी बयान में कहा कि न्याय की मांग कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना और पुलिस वाहन के भीतर तक घुसकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (एसएसपी) द्वारा प्रदर्शनकारियों की पिटाई किए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। अनेक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया। इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा लाठीचार्ज और पुलिस ज्यादती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय उनकी आवाज को दबाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। लोकतांत्रिक ढंग से न्याय की मांग करने वालों पर दमन किसी भी सभ्य लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
भाकपा (माले) ने मांग की कि ललिता गौतम हत्याकांड के सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए, पीड़ित परिवार को समुचित आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जाए।
गौरतलब है कि मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र की रहने वाली बीए की दलित छात्रा ललिता गौतम 15 मई को घर से कॉलेज के लिए निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। उनका शव 17 मई को उसी थाना क्षेत्र के एक खेत में मिला। पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में गैंगरेप, हत्या और शव को तेजाब से जलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने अब तक केवल एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि परिजनों का आरोप है कि घटना में शामिल अन्य आरोपी अब भी खुले घूम रहे हैं। साथ ही, पीड़ित परिवार को अब तक पर्याप्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
