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काकोरी क्रांतिकारियों के साहस, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया गया

लखनऊ। काकोरी एक्शन की 101वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत सेवा संस्थान द्वारा अपने अधीन संचालित चन्द्रभानु गुप्ता लॉ कॉलेज, चन्द्रावल, लखनऊ में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य काकोरी के क्रांतिकारियों के साहस, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को स्मरण करना तथा युवा विधि विद्यार्थियों को उनके संघर्ष से परिचित कराना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एल.पी. मिश्रा रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन, न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता की सामाजिक भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

उन्होंने युवा विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि देश के विकास और निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा, ज्ञान और संकल्प के माध्यम से राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग राष्ट्रहित में करते हुए एक मजबूत, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ही कल के भारत की दिशा तय करेगी और उसके विचार, चरित्र एवं कर्म ही राष्ट्र के भविष्य की नींव रखेंगे।

काकोरी प्रकरण के संदर्भ में यह भी स्मरण किया गया कि चन्द्रभानु गुप्ता जी ने काकोरी के क्रांतिकारियों की ओर से अधिवक्ता के रूप में पैरवी की थी।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘बार के साथ विद्यार्थी संवाद’ रहा, जिसमें विद्यार्थियों को न्यायालयीन कार्यप्रणाली, वकालत के व्यावहारिक पक्ष तथा विधि व्यवसाय की चुनौतियों और संभावनाओं पर सीधे संवाद का अवसर मिला।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. मौलेंदु (पूर्व अध्यक्ष – लुआक्टा), आशीष त्रिवेदी ( वरिष्ठ पत्रकार), अरुण कुमार ( उपाध्यक्ष, भारत सेवा संस्थान), डॉ. अशोक बाजपेयी (अध्यक्ष, भारत सेवा संस्थान), डॉ. जे.एन. मिश्रा (महामंत्री, भारत सेवा संस्थान), राजेश सिंह, (महामंत्री, मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी ) तथा डॉ. एस.पी. सिंह ( प्रबंधक, चन्द्रभानु गुप्ता लॉ कॉलेज एवं पूर्व कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय )सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि विधि का ज्ञान केवल एक पेशे का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय, संविधान और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का साधन भी है।