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खलीलाबाद में अरजाल महापंचायत का आयोजन, अरजाल आरक्षण पर धार्मिक पाबंदी हटाने की मांग

संतकबीरनागर। खलीलाबाद में बाई पास चौराहा स्थित रिलायंस बैंक्वेट होटल में आज भारतीय शोषित नट मंच एवं आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के संयुक्त तत्वावधान में अरजाल महापंचायत का आयोजन किया गया गया। ‘ शिक्षा, आरक्षण, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि ’ विषय पर विचार गोष्ठी भी हुई। कार्यक्रम में उ.प्र. एवं बिहार के अरजाल एवं पसमांदा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। सभी ने आज के दिन को संकल्प दिवस-2  के रूप में मनाया।

कार्यक्रम पश्चात जूलूस निकाल कर उपजिला अधिकारी एवं जिलाधिकारी कार्यालय में अनुसूचित जाति पर लगे धारा 341 पर लगे धार्मिक पाबंदी को हटाने के सम्बन्ध में ज्ञापन दिया गया।

शायर आसिफ रब्बानी ने शायरी के माध्यम से लोगों को शिक्षित करने पर जोर दिया। पूर्वी चम्पारन की रजिया हवारी ने कहा जैसे हिन्दू धोबी को दलित कोटे से चुनाव लड़ने दिया जाता है लेकिन इस अधिकार से वंचित रखा जाता है। हमें सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

सलीम रामपुरी ने कहा- गुलाम भारत में 1936 से हमें डिप्रेस्ड क्लास सोसाइटी के रूप में हमें दलित आरक्षण प्राप्त था लेकिन आजाद भारत में हमें इस अधिकार से वंचित किया गया है।

भारतीय शोषित नट एकता मंच के अध्यक्ष मो. सलीम अफरोज जी ने कहा कि अरजाल आरक्षण पर धार्मिक पाबंदी हटाकर नट समाज को न्याय दिया जाये।

आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष जनाब इशहाक अंसारी जी ने कहा- अरजाल एवं ओबीसी समाज वोट की ताकत को नहीं पहचानता है। वह हमेशा मुस्लिम नाम से वोट देता है और हमेशा छला जाता है। मुस्लिम समाज की बहुलांश आबादी पसमांदा समाज को हक-हिस्सेदारी से शेख, सैयद, पठान इसका पूरा लाभ लेती है यही कारण है कि रोजगार से लेकर सांसद, विधायक एवं न्यायपालिका में हमें ये जातियाँ कोई जगह नहीं देती एवं न ही हमारी समस्याओं पर कोई बात करती हैं।

सूरज (उमर) ने कहा – मुझसे अक्सर लोग नाम के बाद जाति पूछते हैं तो मुझे नट या नेटुआ कहने में कोई हिचक नहीं होती है। इसके लिए हमें कई बार भेदभाव का सामना करना पड़ता है, कुछ लोग अपने समाज के भी मिल जाती है तो ताकत भी बढ़ती है।
सरवर दुर्गेश गफ्फार ने आक्रोश के साथ कहा- हम ओबीसी नहीं है, हम अरजाल हैं, अरजाल। हमें ओबीसी नहीं कहा जाए। हम ओबीसी में कहीं भी फिट नहीं बैठते हैं। मुस्लिम समाज में अरजाल की आबादी 80 फीसदी है।

कार्यक्रम में शहजादा शीशगर, नूर हसन ने अरजाल महापंचायत के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का संचालन मेराज अहमद ने किया। इस मौके पर मो. राशिद, आसिक अली, गुलाम अली, सुहेल अहमद, तसौवर आलम, मुमताज अली, अहमद हुसैन, जमालुद्दीन, अनवर अली, जुनैद अहमद, मो. कासिम, इमानुद्दीन आदि पसमांदा समाज एवं अरजाल समाज के मौजूद थे।