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संयुक्त किसान मोर्चा और मजदूर संगठनों ने प्रदर्शन कर डीएम को सौंपा ज्ञापन

गोरखपुर। संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय श्रमिक व खेत मजदूर संगठनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत आज 10 अगस्त को मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट परिसर में सभा की। इस दौरान भारत-अमेरिका कृषि डील को रद करने, श्रम संहिताओं को वापस लेने , सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी करने की आवाज उठाई गई।

 दोपहर 12 बजे विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ता, गरीब किसान और खेत मजदूर बड़ी संख्या में श्रम विभाग कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहाँ से गगनभेदी नारों के साथ एक विशाल जुलूस निकाला गया, जो जिला अधिकारी (डीएम) कार्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से देश की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में भारत-अमेरिका कृषि डील और सभी किसान विरोधी मुक्त व्यापार समझौतों को तत्काल वापस लेने, कॉरपोरेट-परस्त चारों श्रम संहिताओं को पूरी तरह निरस्त कर पुराने श्रम कानून बहाल करने, पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले निर्दोष छात्रों और नौजवानों पर दर्ज की गई झूठी एफआईआर वापस लेने, गरीब किसानों, बटाईदारों और खेत मजदूरों के सभी बकाया बिजली बिल पूरी तरह माफ करने, प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर रोक लगाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों (C2+50%) के आधार पर सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी का कानून बनाने, मनरेगा के तहत कृषि मजदूरों को प्रति वर्ष 200 दिन का काम और ₹700 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

कलेक्ट्रेट परिसर में हुई एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के जिला सचिव राकेश सिंह ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सरकार एक तरफ कॉरपोरेट घरानों के फायदे के लिए अमेरिकी कृषि डील को बढ़ावा दे रही है, जिससे हमारे देश के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका पूरी तरह छिन जाएगी। वहीं दूसरी तरफ, चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को जबरन लागू कर मजदूरों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। देश की रीढ़ माने जाने वाले किसानों और मजदूरों का यह दमन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिजली के निजीकरण और प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के जरिए आम जनता की जेब पर डकैती डाली जा रही है, जिसे तत्काल बंद कर पुराने बिजली बिल माफ किए जाने चाहिए।”सभा को आगे संबोधित करते हुए माकपा (CPI-M) के जिला सचिव शिव वचन यादव ने युवाओं और छात्रों के उत्पीड़न का मुद्दा पुरजोर ढंग से उठाया।

उन्होंने कहा, “देश का नौजवान आज बदहाल है। नीट (NEET) और अन्य सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक ने छात्रों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। जब युवा इसके खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए उन पर फर्जी एफआईआर दर्ज कर रही है और उन्हें जेलों में डाल रही है। छात्रों और नौजवानों पर किया जा रहा यह प्रशासनिक दमन और गिरफ्तारियां तुरंत बंद होनी चाहिए।”

विरोध प्रदर्शन और मार्च में भाकपा (माले) के जिला कमेटी सदस्य व वरिष्ठ किसान नेता परशुनाथ सिंह, सारे गरीब मोर्चा के संयोजक दीनदयाल यादव, कॉमरेड बिसाती, नया गांव बनकटवा के सचिव सुदामा भारती, वरिष्ठ किसान एवं मजदूर नेता जयप्रकाश यादव, आर.के. सिंह, आइसा (AISA) के छात्र नेता विवेक कुमार और युवा आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता सोनू यादव प्रमुख रूप से शामिल हुए और अपने विचार व्यक्त किए।

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