वाराणसी। संत मदर टेरेसा की पुण्यतिथि के अवसर पर तीन सितंबर को वाराणसी के कैंटोनमेंट स्थित जीपीओ स्क्वायर में मदर तेरेसा की स्मारक प्रतिमा के समक्ष शांति समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का आयोजन डायोसिस ऑफ वाराणसी की ओर से किया गया। इस अवसर पर मदर टेरेसा के प्रेम, करुणा, सेवा और शांति के संदेश को याद किया गया।
वाराणसी धर्म प्रांत के बिशप यूजीन जोसेफ ने कहा कि मानवता की सेवा के लिए मदर टेरेसा का समर्पित जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने जरूरतमंदों और वंचितों की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया तथा पूरी दुनिया को मानवता, प्रेम और शांति का संदेश दिया।

समारोह के माध्यम से समाज में आपसी सद्भाव, शांति और मानव सेवा की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
प्रोफेसर राम सुधार सिंह ने कहा कि मदर टेरेसा का जीवन दो विश्वयुद्धों का साक्षी रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध के ठीक पहले बंगाल में भयंकर अकाल आया जिसमें लाखों लाख लोग काल कवलित हुए थे। मदर ने इस विभीषिका को देखा था। उन्होंने अभावग्रस्त,रोगी, अपाहिज लोगों की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। मदर टेरेसा के अनुसार प्रार्थना का मूल तत्व प्रेम है और प्रेम का मूल तत्व सेवा है। किसी कोढ़ी की घाव को साफ करते हुए उन्हें लगता था कि वे प्रभु यीशु की सेवा कर रही है। मदर का मानना था कि उसका जीना व्यर्थ है जो दूसरे के लिए नहीं जिया।

इस अवसर पर विशाल सारस्वत, राजकुमार , परमानंद, डॉ मोहम्मद आरिफ़ सहित सेंट मेरी स्कूल की प्राचार्य , शिक्षक मौजूद रहे।स्कूल के बच्चों ने गीत के माध्यम से मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि अर्पित किया। संचालन सेंट मेरी स्कूल एवं धन्यवाद फादर थॉमस ने दिया।
