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वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने के काम में तेजी लाने की मांग

बहराइच। मोतीपुर (मिहिनपुरवा) तहसील अंतर्गत वन बस्ती ग्राम श्रीरामपुरवा (सुजौली) में 10 सितंबर को वन अधिकार आंदोलन की बैठक हुई। बैठक में की अध्यक्षता बिशंबर प्रसाद ने की।

इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जंग हिंदुस्तानी ने कहा कि उत्तर प्रदेश  सरकार वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह तत्पर है और इस कार्य में क्षेत्रीय विधायक का भी पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि वन अधिकार आंदोलन के सभी कार्यकर्ता वन अधिकारों के क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पूर्व ही इन सभी वन बस्ती ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक 54 गांव राजस्व ग्राम की श्रेणी में जा चुके हैं। सरकार सभी वन बस्ती ग्रामों, पुरातन आवासों, असर्वेक्षित वन बस्तियों और वन ग्रामों का संज्ञान लेकर उन्हें राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने का  कार्य कर रही है।

बैठक में वन अधिकार आंदोलन के कार्यकर्ता मोहन ने समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वन ग्राम से राजस्व ग्राम में परिवर्तन न होने के कारण उनके गांव में रास्तों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसके चलते बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं लागू नहीं हो पा रही हैं और गांव के वृद्धों, विधवाओं तथा दिव्यांगों को पेंशन योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक श्रीरामपुरवा वन बस्ती ग्राम को राजस्व ग्राम में परिवर्तित नहीं किया जाता, तब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

वन अधिकार आंदोलन के महासचिव रघुवीर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार हमारी मांगों को सुनना और समझना चाहती है, लेकिन प्रशासनिक कर्मचारी जनसमस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसके लिए अब एक बड़े और एकजुट आंदोलन की आवश्यकता है।

बैठक में स्थानीय ग्रामीणों एवं वन अधिकार आंदोलन के कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही।

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