गोरखपुर। नार्मल स्थित ऐतिहासिक दरगाह पर हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां का तीन दिवसीय सालाना उर्स-ए-पाक 19, 20 व 21 जून को रवायत, सादगी, व सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाया जायेगा।
इस बार मेला, जलसा और कव्वाली का मुकाबला नहीं होगा। सैकड़ों सालों से मनाये जाने वाले इस उर्स का अवाम को साल भर से इंतजार रहता है। हजारों लोग शिरकत करते है। कोरोना वॉयरस के प्रकोप की वजह से उर्स का स्वरुप दरगाह प्रांगण तक ही सीमित रहेगा। वहीं हजारों लोग उर्स-ए-पाक में शिरकत भी नहीं कर पायेंगे। चादर व गागर का जुलूस भी निकलेगा।
दरगाह कमेटी के सदर इकरार अहमद ने बताया कि हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां का शुमार पूर्वांचल के बड़े औलिया किराम में होता है। आपका ताल्लुक हजरत सैयद सालार मसूद गाजी मियां अलैहिर्रहमां से है। आप उनके करीबी साथियों में से थे। सैकड़ों साल पहले गोरखपुर तशरीफ लाये और यहीं शहादत पायी। तब से लेकर अब तक यहां हर धर्म के मानने वाले अकीदत का फूल पेश करते चले आ रहे हैं। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है यह दरगाह। यहां लोग बाबा के वसीले से दुआएं मांगते हैं।
हजरत मुबारक खां शहीद उर्स-ए-पाक हर साल इस्लामी माह शव्वाल की 26, 27 व 28 तारीख को अकीदत व धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह तारीख 19, 20 व 21 जून को पड़ रही है। हर साल उर्स के मौके पर मेला लगता था। दीनी जलसा होता था। दो दिन कव्वाली का मुकाबला हुआ करता था।
यह पहला ऐसा मौका होगा जब बेहद सादगी से उर्स मनाया जायेगा। दरगाह के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए तकरीर का प्रोग्राम होगा। जिसमें उलेमा हजरत मुबारक खां शहीद के फजायल बयान करेंगे। कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व नात ख्वानी होगी। मजार का गुस्ल होगा। संदल पोशी होगी। चादर पेश की जायेगी। कुल शरीफ की रस्म परंपरा के अनुसार होगी।
कोरोना वॉयरस के प्रकोप की वजह से दरगाह कमेटी के तमाम पदाधिकारियों ने उर्स बेहद सादगी व सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाने का फैसला लिया है। जरूरतमंदों में लंगर भी बंटेगा।
दरगाह सदर ने जायरीनों से अपील किया है कि उर्स के मौके पर घरों में कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी करें। कोरोना वॉयरस से निज़ात की दुआ मांगें। शासन की गाइडलाइन का पालन करें।
