गोरखपुर. पिपरौली ब्लॉक के तहत आने वाले भौवापार गांव में कालाजार की रोकथाम के लिए लगातार दस दिन तक कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा।
यह जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि पिछले साल इस गांव में कालाजार का एक मामला प्रकाश में आया था। ऐसे स्थान जहां कालाजार का एक भी केस सामने आता है, वहां तीन साल तक वर्ष में दो बार छिड़काव करवाया जाता है।
उन्होंने बताया कि छिड़काव कार्य के सिलसिले में एसीएमओ डॉ. आईबी विश्वकर्मा और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय की मौजूदगी में पिपरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ. सागर, स्वयंसेवी संस्था पाथ के प्रतिनिधि डॉ. ज्ञान ने भी सहयोग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. निरंकेश्वर राय समेत सीएचसी स्टॉफ, आशा, एएनएम और 06 वर्कर्स को छिड़काव के दौरान रखी जाने वाली सावधानी के बारे में जानकारी दी गयी।
प्रशिक्षण का आयोजन कोविड-19 प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए किया गया। सभी प्रशिक्षुओं को समझाया गया है कि वह फिजिकल डिस्टेंसिंग रखते हुए मॉस्क व ग्लब्स का इस्तेमाल कर सावधानी के साथ छिड़काव करेंगे।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छः फीट ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फुल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर पर काला चकत्ता पड़ जाता है।
ऐसे होगा छिड़काव
बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता हैं। ऐसे में सभी प्रशिक्षुओं को बताया गया है कि दवा का छिड़काव घर के अंदर तथा बाहर छह फीट तक कराना है। छिड़काव के बाद तीन माह तक छिड़काव स्थल पर पुताई नहीं होनी चाहिए।
