दो महीने में सात स्थानों पर टूटा महाव नाला का तटबंध, सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद

महराजगंज। महराजगंज जिले के नौतनवा तहसील क्षेत्र में स्थित महाव नाला पर बना तटबंध 13 अगस्त को खैरहवा और झिंगटी के पास टूट गया। इससे इन गांवों और खेतों में नदी पानी भर रहा है। खैरहवा दूबे गांव की सड़कों पर तीन से चार फुट पानी बह रहा है। सैकड़ों एकड़ खेत पानी में डूबे हैं।

महाव नाला पर बना तटबंध दो महीने के अंदर सात स्थानों पर टूट चुका है। सबसे पहले 15 जून को तटबंध चार स्थानों-खैरहवा दूबे, अमहवा, विशुनपुरा में टूट था। इसके बाद आठ जुलाई को झिंगटी के पास तटबंध टूटा। शुक्रवार 13 अगस्त की रात खैरहवा दूबे में एक दूसरी जगह तटबंध टूट गया। इसी तरह झिंगटी में भी तटबंध टूट गया। पहले टूटे तटबंधों की मरम्मत का कार्य भी नहीं हो पाया है।

खैरहवा दूबे गांव में महाव नाला का तटबंध टूटने से नदी का पानी पूरे गांव में भर रहा है। गांव की सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है। गांव से तटबंध की ओर जाने वाले खड़ंजा सड़क पर तीन जगह पानी बह रहा है। गांव को बरगदवा-नौतनवा जोड़ने वाली मुख्य सड़क कट गई है। गांव के लोग कटी सड़क पर चंचरी पुल बना कर किसी तरह आवागमन कर रहे हैं।

खैरहवा दूबे गांव के लोगों ने बताया कि नदी में काफी बालू और सिल्ट आ रहा है। तटबंध टूटने के कारण खेत सिल्ट व बालू से पट रहे हैं जिससे दर्जनों किसानों के खेत अनउपजाउ हो गए हैं। तटबंध टूटने से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। दो महीने के अंदर दो बार तटबंध टूटने से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गयी है।

महाव नाला नेपाल सीमा से नौतनवा व बरगदवा क्षेेत्र में करीब 15 किलोमीटर प्रवाहित होेने के बाद सोहगीबरवां सेंुचरी में प्रवेश करती है और फिर करीब आठ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद रोहिन नदी में मिल जाती है। इस सर्पीली नदी पर नदी के तट को उंचा कर कामचलाउ तटबंध बनाया गया है जो हर वर्ष टूट जाता है। तटबंध टूटने से करीब दो दर्जन गांव की आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है और सैकड़ों हेक्टेयर फसल बर्बाद होती है।